Fact Check: मुरादाबाद के सरकारी सर्किट हाउस परिसर में सपा जिला उपाध्यक्ष हाजी मोहम्मद उस्मान के नमाज पढ़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो सामने आने के बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज होने को लेकर सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि नमाज पढ़ने पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दिया। लेकिन Factgiri की पड़ताल में तस्वीर इससे थोड़ी अलग सामने आती है।
क्या है वायरल दावा?
वायरल पोस्ट में कहा जा रहा है कि हाजी मोहम्मद उस्मान ने सर्किट हाउस परिसर में नमाज पढ़ी और इसी वजह से उनके खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई। कुछ पोस्ट इसे धार्मिक आधार पर कार्रवाई के तौर पर भी पेश कर रहे हैं। वहीं विपक्ष इस मामले में यूपी सरकार पर हिंदू-मुस्लिम भेदभाव का आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना 3 सितंबर 2026 की है। सपा नेताओं की बैठक के दौरान हाजी मोहम्मद उस्मान सर्किट हाउस परिसर में मौजूद थे। वायरल वीडियो में वह अपनी गाड़ी के पीछे नमाज पढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
इसके बाद PWD के सर्किट हाउस प्रभारी और अवर अभियंता अनित कुमार की शिकायत पर मझोला थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने BNS की धारा 285 और 292 लगाई हैं।
Factgiri की पड़ताल
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात FIR में लगाए गए आरोप हैं। Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने बताया कि शिकायत में आरोप था कि उस्मान ने सर्किट हाउस के आने-जाने वाले रास्ते पर अपनी गाड़ी खड़ी कर दी, जिससे लोगों और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। FIR में भी वाहन को रास्ते पर खड़ा करने और उसके पीछे नमाज पढ़ने का उल्लेख है।
ANI की रिपोर्ट में भी मुरादाबाद के SP सिटी कुमार रणविजय सिंह के हवाले से कहा गया कि शिकायत में ट्रैफिक और लोगों की आवाजाही प्रभावित होने का आरोप था और इसी आधार पर संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया।
यानी उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि “सिर्फ नमाज पढ़ने के कारण FIR हुई।” FIR में जिन धाराओं का इस्तेमाल हुआ है, वे सार्वजनिक रास्ते में बाधा और सार्वजनिक उपद्रव से संबंधित हैं।
निष्कर्ष
Factgiri Verdict: MISLEADING / भ्रामक
नमाज पढ़ने का वीडियो और FIR दोनों वास्तविक हैं, लेकिन इसे सीधे “नमाज पढ़ने पर FIR” कहना अधूरा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुलिस कार्रवाई का आधार रास्ता बाधित करने और सार्वजनिक आवाजाही प्रभावित होने का आरोप है, न कि केवल नमाज अदा करना।




