Fact Check: क्या कैश बांटते पकड़े गए थे विनोद तावड़े? सपा के वायरल दावे का सच आया सामने, मामला कुछ और था

Fact Check: समाजवादी पार्टी (SP) मीडिया सेल ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े का एक वीडियो शेयर कर तीखा तंज कसा है। सपा मीडिया सेल ने दावा किया है कि बीजेपी के यूपी प्रभारी चुनाव जीतने के लिए करोड़ों रुपये का कैश बांटते हुए रंगे हाथों पकड़े गए हैं। जब हमारी फैक्ट चेक टीम ने इस वायरल दावे की पड़ताल की, तो सच कुछ और ही निकला। सपा मीडिया सेल का यह दावा पूरी तरह भ्रामक और वीडियो 2 साल पुराना है।

क्या है सपा मीडिया सेल का दावा?

समाजवादी पार्टी के आधिकारिक मीडिया सेल हैंडल से विनोद तावड़े का एक वीडियो पोस्ट किया गया, जिसमें वे भारी भीड़ और हंगामे के बीच घिरे नजर आ रहे हैं। सपा ने तंज कसते हुए लिखा कि “बीजेपी के ईमानदार यूपी प्रभारी चुनाव में ‘कैश फॉर वोट’ यानी ₹5 करोड़ बांटते पकड़े गए हैं। क्या चुनाव आयोग इस पर कार्रवाई करेगा?

पड़ताल में क्या आया सामने?

Factgiri की टीम ने जब इस वीडियो के की-फ्रेम्स को रिवर्स-सर्च किया और पुलिस व चुनाव आयोग (EC) के आधिकारिक बयानों को खंगाला, तो पूरा मामला साफ हो गया, यह मामला उत्तर प्रदेश का नहीं है। यह वीडियो नवंबर 2024 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान का है, जब मतदान से ठीक एक दिन पहले पालघर जिले के विरार स्थित एक होटल में बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया था।

विपक्ष ने आरोप लगाया था कि तावड़े ₹5 करोड़ बांटने आए थे। लेकिन चुनाव आयोग और पुलिस की छापेमारी में होटल से ₹5 करोड़ नहीं, बल्कि ₹9,53,900 (करीब साढ़े नौ लाख रुपये) बरामद हुए थे। The Wire की रिपोर्ट के मुताबिक, करोड़ों रुपये बांटने का आरोप जांच में साबित नहीं हुआ था।

FIR पैसे बांटने पर नहीं, आचार संहिता पर हुई

चुनाव आयोग के निर्देश पर विरार के तुलिंज पुलिस स्टेशन में जो 3 एफआईआर (FIR) दर्ज की गईं, वे ‘वोट के बदले नोट’ देने के जुर्म में नहीं थीं। India Today की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव प्रचार बंद होने के बाद (साइलेंस पीरियड में) किसी बाहरी क्षेत्र के होटल में अनाधिकृत रूप से बैठक करने और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के कारण आचार संहिता उल्लंघन (Model Code of Conduct) के तहत यह कार्रवाई की गई थी।

Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, विनोद तावड़े ने साफ किया था कि वे सिर्फ बूथ कार्यकर्ताओं को वोटिंग के दिन की गाइडलाइंस समझाने गए थे। उन्होंने खुद होटल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज की जांच की मांग की थी ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

सपा ने अब क्यों निकाला ये वीडियो?

5 सितंबर 2026 को लखनऊ पहुंचे विनोद तावड़े ने सपा के PDA नारे पर तंज कसते हुए कहा था- PDA का मतलब है पराया धन अपना। इसी बयान के जवाब में सपा ने पुराना कैशकांड वीडियो निकालकर तावड़े को ‘वसूली तंत्र’ का तमगा दिया।

निष्कर्ष

हमारी पड़ताल से यह साबित होता है कि समाजवादी पार्टी मीडिया सेल द्वारा शेयर किया गया वीडियो और किया गया दावा भ्रामक/MISLEADING है।

विनोद तावड़े पर ₹5 करोड़ कैश बांटने का आरोप कभी साबित नहीं हुआ। उनके खिलाफ हुई कानूनी कार्रवाई केवल चुनाव के ‘साइलेंस पीरियड’ के नियमों का उल्लंघन करने (आचार संहिता) को लेकर थी।

राजनीतिक लाभ के लिए महाराष्ट्र के पुराने मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

Hot this week

BJP ने इलाहाबाद बैंक बेच दिया? अखिलेश यादव के दावे की FactGiri पड़ताल

Factgiri Fact Check: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश...

Topics

BJP ने इलाहाबाद बैंक बेच दिया? अखिलेश यादव के दावे की FactGiri पड़ताल

Factgiri Fact Check: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img