FactGiri Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल है। वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक कार्यक्रम से बाहर निकलते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एक कथित महिला पत्रकार की आवाज सुनाई देती है… सवाल का जवाब नहीं देना था तो बुलाया क्यों? इस वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि पत्रकारों को सवाल पूछने के लिए बुलाया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री ने सवालों का जवाब दिए बिना कार्यक्रम छोड़ दिया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी वीडियो शेयर कर योगी सरकार पर निशाना साधा और प्रेस वार्ता की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
FACTGIRI की पड़ताल में क्या सच सामने आया?
FACTGIRI ने वायरल वीडियो के साथ उपलब्ध दूसरे फुटेज, कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी और संबंधित पत्रकार के सार्वजनिक सोशल मीडिया अकाउंट की पड़ताल की। जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो का जो हिस्सा सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है, उसमें महिला पत्रकार मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से निकलने के दौरान अपनी बात कहती दिखाई देती हैं। हालांकि, वायरल वीडियो के पूरे घटनाक्रम या उपलब्ध अन्य फुटेज में ऐसा स्पष्ट हिस्सा नहीं मिला, जिसमें वह पत्रकार पहले मुख्यमंत्री से कोई सवाल पूछती हुई दिखाई दें और उसके जवाब के तौर पर यह प्रतिक्रिया सामने आई हो और जैसे ही मुख्यमंत्री बाहर निकल जाते हैं, महिला पत्रकार इस तरह से खुश होती है, जैसे उसे जो चाहिए था वह क्लिप मिल गई है।
बल्कि उपलब्ध क्लिप में महिला पत्रकार खुद मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड करती हुई दिखाई देती हैं और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से निकलते समय जवाब को लेकर आवाज लगाती नजर आती हैं। यानी सोशल मीडिया पर जिस तरह इस कुछ सेकंड के वीडियो को “पत्रकार ने सवाल पूछा और योगी बिना जवाब दिए चले गए” के रूप में पेश किया जा रहा है, उसके लिए वायरल क्लिप में पर्याप्त पूरा संदर्भ मौजूद नहीं है।
पूरे वीडियो की तलाश में क्या मिला?
FACTGIRI ने वायरल क्लिप के मूल या लंबे संस्करण की तलाश की। लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक फुटेज में महिला पत्रकार द्वारा मुख्यमंत्री से पूछे गए कथित सवाल और उसके जवाब का पूरा क्रम नहीं मिला।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वायरल वीडियो में महिला पत्रकार की ओर से जवाब मांगने की आवाज तो स्पष्ट रूप से सुनाई देती है, लेकिन उससे ठीक पहले उन्होंने मुख्यमंत्री से कौन-सा सवाल पूछा था, उसका स्पष्ट वीडियो फुटेज उपलब्ध नहीं मिला।
इसलिए केवल इस क्लिप के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि मुख्यमंत्री ने किसी सवाल का जवाब देने से इनकार किया और वहां से चले गए, पूरी तरह स्थापित नहीं होता।
महिला पत्रकार के सोशल मीडिया अकाउंट की भी FACTGIRI ने की पड़ताल
FACTGIRI ने वायरल वीडियो में दिखाई दे रही महिला पत्रकार के सार्वजनिक सोशल मीडिया अकाउंट को भी देखा। उनके अकाउंट पर ऐसे कई पोस्ट मिले, जिनमें लगातार एक तरफा रिपोर्टिंग की गई है। इससे कथित महिला पत्रकार की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं। वह जहां अपने वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार की आलोचना करती है वहीं समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के पक्ष में लगातार पॉजिटिव रिपोर्टिंग की गई है, यहां तक कि उत्साहवर्धन भी किया जाता रहा है।
FACTGIRI की पड़ताल में यह सामने आया कि वायरल वीडियो में महिला पत्रकार की आवाज और मुख्यमंत्री का कार्यक्रम से निकलना वास्तविक घटनाक्रम का हिस्सा है। लेकिन वीडियो को कुछ सेकंड के हिस्से के रूप में शेयर कर उससे यह निष्कर्ष निकालना कि “पत्रकार ने सवाल पूछा, CM योगी ने जवाब नहीं दिया और सवालों से बचकर निकल गए, उपलब्ध फुटेज से पूरी तरह साबित नहीं होता। पूरे घटनाक्रम की तलाश में महिला पत्रकार द्वारा पहले कोई सवाल पूछे जाने और उसके जवाब का स्पष्ट वीडियो फुटेज भी सामने नहीं आया।
भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस पार्टी के ‘सेवा संकल्प अभियान’ की जानकारी देने के लिए बुलाई गई थी, जिसमें प्रश्न-उत्तर (Q&A) का कोई सत्र निर्धारित नहीं था। उन्होंने पत्रकार की संस्थागत पहचान पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के प्रस्थान के बाद केवल वीडियो बनाने के मकसद से यह विवाद खड़ा किया गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रेस ब्रीफिंग में अंतर
किसी कार्यक्रम को ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस’ या ‘प्रेस ब्रीफिंग’ कहे जाने का अर्थ और उसका वास्तविक प्रारूप अलग-अलग हो सकता है। किसी कार्यक्रम में यदि पहले से प्रश्नोत्तर सत्र निर्धारित नहीं है, तो वहां मौजूद पत्रकारों का सवाल पूछना और आयोजकों का उस सवाल का जवाब देना अनिवार्य नहीं माना जा सकता।
वहीं, यदि आयोजक इसे स्पष्ट रूप से प्रश्नोत्तर वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस के रूप में आयोजित करते हैं, तो पत्रकारों के सवालों को लेने की अपेक्षा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।




