Fact Check: उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के नाम से सोशल मीडिया पर एक इमेज वायरल है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि “भाजपा सरकार से परेशान होकर 13 IAS और 7 IPS ने इस्तीफा दिया है। यह दावा आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद तेजी से वायरल हुआ। अजय राय ने भी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर यूपी की प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों पर कथित दबाव का मुद्दा उठाया।
लेकिन क्या वाकई ये 13 IAS और 7 IPS सभी उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी हैं और उन्होंने भाजपा सरकार से परेशान होकर नौकरी छोड़ी? Factgiri ने उपलब्ध रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर इसकी पड़ताल की।
क्या कहा अजय राय ने?
अजय राय ने 31 अगस्त 2026 के आसपास राज्यपाल को भेजे पत्र और बाद के बयानों में कहा कि योगी सरकार बनने के बाद 13 IAS और 7 IPS अधिकारियों ने इस्तीफा या VRS लिया, जिसे उन्होंने प्रदेश के लिए चिंता का विषय बताया। उन्होंने अधिकारियों पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का आरोप भी लगाया
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 2017 के बाद उत्तर प्रदेश कैडर के 13 IAS अधिकारियों का इस्तीफे या VRS के जरिए सेवा से बाहर होना दर्ज किया गया है। इनमें नौ अधिकारियों ने VRS लिया, जबकि चार ने इस्तीफा दिया।
VRS लेने वाले अधिकारी
आरपी सिंह — VRS
राजीव अग्रवाल — VRS
मोहम्मद मुस्तफा — व्यक्तिगत कारणों से VRS
आमोद कुमार — VRS
रेणुका कुमार — व्यक्तिगत कारणों से VRS
जूथिका पाटणकर — व्यक्तिगत कारणों से VRS
विकास गोठलवाल — स्वास्थ्य संबंधी कारणों से VRS
रिग्जियान सैंफिल — स्वास्थ्य संबंधी कारणों से VRS
अनामिका सिंह — VRS का आवेदन/सेवा से बाहर होने की प्रक्रिया रिपोर्ट हुई थी।
उपलब्ध रिपोर्टों में अधिकांश वरिष्ठ अधिकारियों के लिए व्यक्तिगत या स्वास्थ्य संबंधी कारण सामने आए हैं। कुछ मामलों में सरकारी सेवा के बाहर बेहतर अवसरों की बात भी सामने आई।
विद्या भूषण — इस्तीफा
इस्तीफा देने वाले अधिकारी
एस. मुथु शालिनी — इस्तीफा
अभिषेक सिंह — 2023 में इस्तीफा, जिसे 2024 में स्वीकार किया गया; बाद में राजनीति में सक्रिय हुए।
दिव्या मित्तल — 30 अगस्त 2026 को 13 साल की सेवा के बाद इस्तीफा। उन्होंने अपने विदाई संदेश में अपनी यात्रा, देश की सेवा और आगे की प्राथमिकताओं की बात की, लेकिन किसी राजनीतिक दबाव को इस्तीफे का कारण नहीं बताया।
यहां रिंकू सिंह राही का मामला अलग है। उन्होंने मार्च 2026 में तकनीकी इस्तीफा दिया था और प्रशासनिक व्यवस्था, काम न मिलने तथा लंबे समय तक पोस्टिंग से दूर रखे जाने पर सवाल उठाए थे। लेकिन उन्होंने बाद में इस्तीफा वापस ले लिया और मई 2026 में उन्हें नई पोस्टिंग भी मिल गई।
यहीं अजय राय के दावे का सबसे बड़ा पेंच सामने आता है।
हाल के महीनों में 7-8 युवा IPS अधिकारियों के देशभर में इस्तीफा देने की खबरें जरूर सामने आई हैं, लेकिन ये सभी उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी नहीं हैं। रिपोर्टों में सिद्धार्थ कौशल (आंध्र प्रदेश), लोकेश्वर सिंह (उत्तराखंड), काम्या मिश्रा (बिहार), अभिषेक तिवारी (मध्य प्रदेश), जगमोहन मीणा और सी.ए. रामदास (ओडिशा) समेत अलग-अलग कैडर के अधिकारियों का उल्लेख है।
सिद्धार्थ कौशल के कॉर्पोरेट सेक्टर में जाने की रिपोर्ट है, लोकेश्वर सिंह के संयुक्त राष्ट्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय असाइनमेंट से जुड़ने की बात सामने आई, जबकि सी.ए. रामदास ने ट्रेनिंग के दौरान ही इस्तीफा दे दिया था। कई अन्य मामलों में आधिकारिक तौर पर विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए गए। पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण 2022 में बीजेपी में शामिल हो गए।

इसलिए देशभर के IPS इस्तीफों की संख्या को सिर्फ उत्तर प्रदेश सरकार के कार्यकाल में यूपी कैडर के 7 IPS अधिकारियों के इस्तीफे के रूप में पेश करना सही नहीं है।
निष्कर्ष
Factgiri Verdict: MISLEADING | भ्रामक
अजय राय का 13 IAS वाला आंकड़ा broadly यूपी कैडर के उन अधिकारियों से जुड़ता है जिन्होंने 2017 के बाद इस्तीफा या VRS लिया, लेकिन इसमें अलग-अलग परिस्थितियों वाले अधिकारी शामिल हैं। वहीं 7 IPS को यूपी कैडर का बताना सही नहीं है—हालिया 7-8 IPS इस्तीफों में अलग-अलग राज्यों के अधिकारी शामिल हैं।




