Factgiri Fact Check: सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर वाला एक ग्राफिक वायरल हो रहा है। इसमें News18 इंडिया का लोगो लगाकर योगी के नाम से दावा किया गया है कि उनकी सरकार ने 2017 के बाद देश में सबसे ज्यादा शराब की दुकानें खुलवाईं और युवा शराब पीकर अपने परिवार को बर्बाद करें। FactGiri ने वायरल तस्वीर, कथित बयान और शराब की दुकानों के सरकारी आंकड़ों की अलग-अलग पड़ताल की।
वायरल तस्वीर में क्या दिखाई देता है?
ग्राफिक के ऊपरी दाएं हिस्से में News18 इंडिया का लोगो लगा है। बीच में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से कथित बयान लिखा है, जबकि नीचे उनकी तस्वीर और ‘सीएम योगी’ की पट्टी दिखाई देती है।
हालांकि ग्राफिक में न तो बयान देने की तारीख है और न ही किसी कार्यक्रम या मूल वीडियो का उल्लेख। केवल न्यूज चैनल का लोगो होने से यह प्रमाणित नहीं होता कि चैनल ने वास्तव में ऐसा बयान प्रसारित किया था।
क्या मुख्यमंत्री योगी ने ऐसा बयान दिया था?
FactGiri ने वायरल तस्वीर में लिखे कथन के प्रमुख शब्दों और News18 इंडिया से जुड़े कीवर्ड के आधार पर सार्वजनिक समाचार स्रोतों की खोज की, पर ऐसा कोई बयान हमें नहीं मिला। इस दौरान ऐसा कोई प्रमाणित वीडियो, भाषण या समाचार रिपोर्ट भी नहीं मिली जिसमें मुख्यमंत्री योगी ने युवाओं से शराब पीकर परिवार बर्बाद करने की बात कही हो।
इसके विपरीत, 8 अक्टूबर 2026 को नवभारत टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ में खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र देने के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं को शराब से दूर रहने की सलाह दी थी। शेयर किए गए ग्राफिक को ध्यान से देखने पर राइट साइड में नीचे की ओर कॉर्नर पर grok का लोगो है, जिससे ये स्पष्ट होता है कि ये AI जेनरेटेड इमेज है।

क्या यूपी में शराब की दुकानें बढ़ी हैं?
शराब दुकानों के सवाल पर उपलब्ध रिकॉर्ड अलग तस्वीर पेश करते हैं। इंडिया टुडे की 13 जुलाई 2021 की RTI आधारित रिपोर्ट के अनुसार योगी सरकार के शुरुआती चार वर्षों में 2,076 नई शराब दुकानों को लाइसेंस मिले थे। अखिलेश सरकार के पांच वर्षों में यह संख्या 2,566 और मायावती सरकार के कार्यकाल में 3,621 थी।
FactGiri का निष्कर्ष
FactGiri की पड़ताल में News18 इंडिया के लोगो वाली वायरल तस्वीर में मुख्यमंत्री योगी के नाम से लिखे कथन की पुष्टि नहीं हुई।
FactGiri Verdict: कथित बयान अप्रमाणित/ FAKE– सात दुकानों का दावा असत्यापित।




