Fact Check: समाजवादी पार्टी मीडिया सेल ने गोरखपुर में पार्टी नेताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे और पुलिस कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। पोस्ट में आरोप लगाया गया कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा नेताओं को निशाना बनाकर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। हालांकि, Factgiri की पड़ताल में सामने आया कि मामले में जमीन विवाद, वायरल वीडियो और एक महिला की लिखित शिकायत के बाद पुलिस कार्रवाई हुई है, ना कि किसी राजनीतिक दबाव में।
क्या है वायरल दावा?
सपा मीडिया सेल ने दो न्यूज क्लिपिंग्स शेयर करते हुए आरोप लगाया कि गोरखपुर में सपा नेताओं को राजनीतिक बदले की भावना से फर्जी मुकदमों में फंसाया जा रहा है।
कहां से शुरू हुआ विवाद?
दैनिक भास्कर इंग्लिश की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला गोरखपुर के राजघाट थाना क्षेत्र के खोखर टोला का है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 1 सितंबर को सपा नेता जफर अमीन उर्फ डक्कू, सपा महानगर अध्यक्ष शब्बीर कुरैशी और उनके समर्थक विवादित जमीन पर पहुंचे थे। वहां टिनशेड और पाइप हटाने को लेकर महिलाओं से विवाद हो गया। कहासुनी के बाद मारपीट और अभद्रता के आरोप लगाए गए। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
इसके बाद शहाना खातून की तहरीर पर राजघाट थाने में डक्कू, शब्बीर कुरैशी समेत अन्य लोगों के खिलाफ जमीन पर कब्जे के प्रयास, मारपीट और धमकी समेत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने डक्कू को हिरासत में लिया, जबकि शब्बीर कुरैशी समेत अन्य आरोपियों की तलाश में टीमें लगाई गईं।
Factgiri ने जब आरोपी के पुराने मामलों की छानबीन की तो, हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में सामने आया कि जफर अमीन डक्कू के खिलाफ नवंबर 2020 में गोरखपुर के कोतवाली थाने में दुष्कर्म, छेड़खानी और जान से मारने की धमकी समेत धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, यह FIR अदालत के आदेश के बाद दर्ज की गई थी।

Factgiri की पड़ताल में क्या निकला?
सपा का फर्जी मुकदमा और राजनीतिक बदले के तहत कार्रवाई वाला दावा अप्रमाणित और भ्रामक है। FIR एक महिला की लिखित शिकायत और वायरल वीडियो के बाद दर्ज की गई है।
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