Fact Check: रायबरेली के लालगंज तहसील क्षेत्र में लेखपाल पर रिश्वत मांगने और पैसे न देने पर महिला से उसकी बेटी को भेजने की कथित मांग का मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। मामले को लेकर विपक्षी नेताओं ने भी सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए। लेकिन प्रशासनिक जांच में लेखपाल के खिलाफ लगाए गए इन गंभीर आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।
मामला सरेनी ब्लॉक के मलकेगांव से जुड़ा है। वायरल शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बारिश से मकान क्षतिग्रस्त होने के बाद सरकारी राहत/मुआवजे के लिए लेखपाल से रिपोर्ट लगाने को कहा गया। आरोप था कि रिपोर्ट के बदले पैसे मांगे गए और पैसे न देने पर महिला की बेटी को भेजने की आपत्तिजनक बात कही गई।
क्या था वायरल दावा?
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और पोस्ट में महिला की ओर से लेखपाल पर गंभीर आरोप लगाए गए। मामला सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने इसे प्रशासनिक भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा।
शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में भी आरोपों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था और प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात कही थी।
Factgiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
प्रशासन की जांच के मुताबिक, 11 सितंबर को जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर संबंधित पक्षों, ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए। जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता नीलम द्विवेदी का मायका मलकेगांव में है और उनके पिता बाबूशंकर द्विवेदी का कच्चा मकान पहले से क्षतिग्रस्त था।
अभिलेखों की जांच में यह भी सामने आया कि 7 सितंबर को क्षेत्रीय लेखपाल ने प्रपत्र-20 पर मकान के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट राजस्व निरीक्षक कार्यालय में भेजी गई और मामले को ऑनलाइन पोर्टल पर आगे की कार्रवाई के लिए दर्ज किया गया।
जांच टीम के सामने ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने लेखपाल पर पैसे या किसी अन्य लाभ की मांग किए जाने के आरोपों को गलत बताया। सबसे अहम बात यह रही कि शिकायतकर्ता के पिता बाबूशंकर ने भी लेखपाल पर रिश्वत मांगने के आरोप को गलत बताया। उन्होंने कहा कि लेखपाल ने किसी से पैसे नहीं मांगे और उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
मुआवजे को लेकर क्या था विवाद?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, मकान गिरने के बाद राहत की मांग की गई थी, लेकिन संबंधित मामले में पात्रता के आधार पर शिकायतकर्ता के पक्ष में रिपोर्ट नहीं दी गई। प्रशासन के मुताबिक, इसी को लेकर लेखपाल पर आरोप लगाए गए।
निष्कर्ष
रायबरेली में लेखपाल पर रिश्वत मांगने और पैसे न देने पर बेटी को भेजने की कथित मांग का आरोप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लेकिन प्रशासन की प्रारंभिक जांच में इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। शिकायतकर्ता के पिता और स्थानीय लोगों के बयानों ने भी आरोपों का समर्थन नहीं किया।
इसलिए वायरल दावे को सत्यापित तथ्य के रूप में पेश करना भ्रामक है।
Verdict: MISLEADING | भ्रामक दावा




