Factgiri Fact Check: सोशल मीडिया पर एक पोस्टर वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि सहारनपुर के हिंदू पुजारी रामलाल ने पत्नी और बेटी के साथ इस्लाम धर्म अपना लिया है। पोस्ट में यह भी दावा है कि धर्म परिवर्तन के बाद उनका नाम मुहम्मद अब्दुल्ला हो गया और उन्होंने मस्जिद के लिए 2 कनाल जमीन दान करने की घोषणा की। FactGiri की पड़ताल में इन दावों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस और स्वतंत्र प्रमाण नहीं मिला। वायरल इमेज एक AI जेनरेटेड ग्राफिक है।
वायरल पोस्ट में क्या दावा किया गया?
फेसबुक के ‘मैं रवीश कुमार’ नाम के पेज से यह पोस्ट शेयर की गई। इसमें इलियास उतवरिया के हवाले से दावा किया गया कि रामलाल ने कुरान का अनुवाद पढ़ने के बाद इस्लाम में रुचि विकसित की और बाद में परिवार समेत धर्म परिवर्तन कर लिया। पोस्ट में नाम बदलकर मुहम्मद अब्दुल्ला रखने और सहारनपुर में मस्जिद के लिए जमीन देने की बात भी कही गई है।

FactGiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
FactGiri ने वायरल पोस्टर की तस्वीर की रिवर्स इमेज सर्च के साथ इंटरनेट पर उपलब्ध संबंधित रिपोर्टों और रिकॉर्ड की जांच की। इस दौरान अग्नि आलोक की एक रिपोर्ट मिली, जिसमें सहारनपुर के रामलाल के परिवार समेत इस्लाम अपनाने का दावा किया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में भी किसी आधिकारिक दस्तावेज, संबंधित व्यक्ति के प्रत्यक्ष बयान या स्वतंत्र स्थानीय रिपोर्ट को प्रमाण के तौर पर पेश नहीं किया गया है।
इसके अलावा सहारनपुर से जुड़े उपलब्ध सार्वजनिक सरकारी रिकॉर्ड में भी धर्म परिवर्तन या 2 कनाल जमीन मस्जिद को दान करने की पुष्टि करने वाला कोई प्रमाण FactGiri की पड़ताल में सामने नहीं आया।
2 कनाल जमीन दान करने का दावा भी अप्रमाणित
वायरल पोस्ट में जमीन दान करने का दावा इस कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन इसके समर्थन में न तो कोई पंजीकृत दस्तावेज सामने आया, न संबंधित व्यक्ति का सत्यापित बयान और न ही किसी विश्वसनीय स्थानीय समाचार संस्था की स्वतंत्र रिपोर्ट।
FactGiri का निष्कर्ष
दावा: सहारनपुर के पुजारी रामलाल ने परिवार समेत इस्लाम अपनाकर अपना नाम मुहम्मद अब्दुल्ला रख लिया और मस्जिद के लिए 2 कनाल जमीन दान की।
FactGiri का निष्कर्ष: दावा अप्रमाणित और भ्रामक है। ग्राफिक AI जेनरेटेड है जिसे, सोशल मीडिया पर बिना किसी प्रमाण और ऑथेंटिसिटी के वायरल किया जा रहा है। वायरल पोस्टर के दावों की पुष्टि करने वाला कोई विश्वसनीय प्राथमिक या स्वतंत्र प्रमाण नहीं मिला। न हि किसी ऑथेंचिक न्यूज चैनल या पोर्टल ने इस खबरकी कोई पुष्टि की है।




