Sugar Shortage Fact Check: सोशल मीडिया और कुछ दावों के बीच उत्तर प्रदेश में चीनी की कमी को लेकर लोगों में चिंता बढ़ रही है। दावा किया जा रहा है कि चीनी का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है और आने वाले दिनों में बाजार में इसकी भारी किल्लत हो सकती है। लेकिन यूपी सरकार के उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े इस दावे की तस्वीर कुछ और बताते हैं। 20 अगस्त 2026 तक प्रदेश की चीनी मिलों में कुल 179.38 लाख कुंतल चीनी का स्टॉक उपलब्ध था। ऐसे में यह कहना कि उत्तर प्रदेश में चीनी खत्म होने की स्थिति है, उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से पुष्ट नहीं होता।
Fact Check: यूपी में चीनी का स्टॉक कितना है?
यूपी सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 20 अगस्त 2026 तक प्रदेश की चीनी मिलों में कुल 179.38 लाख कुंतल चीनी उपलब्ध थी। इसमें सहकारी चीनी मिलों के पास 23.60 लाख कुंतल, निगम की चीनी मिलों में 5.28 लाख कुंतल और निजी चीनी मिलों में 150.50 लाख कुंतल चीनी का स्टॉक शामिल है।
सरकारी दस्तावेज के अनुसार, जून और जुलाई 2026 के दौरान चीनी मिलों की ओर से करीब 235 लाख कुंतल चीनी की बिक्री की जा चुकी है। इसमें से बड़ी मात्रा अभी भी खुले बाजार में उपलब्ध होने की बात कही गई है। सरकार ने लोगों को अनावश्यक रूप से चीनी की कमी की धारणा बनाने वाली अफवाहों से सावधान रहने को कहा है।

क्या चीनी की कमी का दावा सही है?
दावा: उत्तर प्रदेश में चीनी का स्टॉक खत्म हो रहा है और जल्द ही बाजार में इसकी भारी कमी हो सकती है।
पड़ताल: उपलब्ध यूपी सरकार के आधिकारिक आंकड़ों में 20 अगस्त तक चीनी मिलों के पास 179.38 लाख कुंतल स्टॉक दर्ज है। इसके अलावा सरकार ने जरूरत पड़ने पर 15 अक्टूबर 2026 से चीनी मिलों का संचालन शुरू करने की तैयारी भी बताई है। इसलिए मौजूदा सरकारी आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में चीनी खत्म होने का दावा सही नहीं ठहरता।
नतीजा: भ्रामक दावा। चीनी की कीमतों या उपलब्धता को लेकर स्थानीय स्तर पर समस्या हो सकती है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े प्रदेश में चीनी का स्टॉक खत्म होने की बात का समर्थन नहीं करते।
सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए क्या नियम लागू किए?
चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नजर रखने के लिए केंद्र सरकार की ओर से स्टॉक रखने की सीमा तय की गई है। सरकारी दस्तावेज के मुताबिक, कोई भी चीनी डीलर 30 दिन से अधिक का स्टॉक नहीं रख सकेगा। इसके अलावा एक समय में किसी डीलर के पास 400 टन से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं होना चाहिए।
वहीं, हर महीने कम से कम 10 मीट्रिक टन चीनी की खपत करने वाले बल्क कंज्यूमर्स को अपनी 15 दिन की जरूरत से ज्यादा चीनी रखने की अनुमति नहीं होगी। चीनी मिलें भी अपने मासिक कोटे के तहत बेची गई चीनी को बिक्री की तारीख से सात दिन से ज्यादा समय तक गोदाम में नहीं रोक सकेंगी।
जिलों में होगी स्टॉक की जांच
सरकार ने जिलाधिकारियों को चीनी मिलों, थोक और फुटकर विक्रेताओं के गोदामों का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य वास्तविक स्टॉक की स्थिति का पता लगाना और जमाखोरी पर नजर रखना है।
इसके साथ ही जिलों में चीनी की उपलब्धता और कीमतों की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। यदि कहीं आर्टिफिशियल शॉर्टेज पैदा करने या कीमत बढ़ाने की स्थिति सामने आती है तो शासन को तत्काल जानकारी देने के निर्देश हैं। निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक या जमाखोरी पाए जाने पर नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
आगे कितना चीनी उत्पादन होने की उम्मीद?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यूपी में आगामी पेराई सत्र 2026-27 के लिए करीब 28.14 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल संभावित है। इस पेराई सत्र की शुरुआत 15 अक्टूबर 2026 से संभावित बताई गई है।
सरकार को इस सत्र में प्रदेश में करीब 90 लाख टन चीनी उत्पादन की उम्मीद है। वहीं प्रदेश में चीनी की अनुमानित मासिक खपत करीब 4 लाख टन बताई गई है।
गन्ना किसानों को कितना भुगतान हुआ?
सरकारी दस्तावेज में पेराई सत्र 2025-26 के गन्ना मूल्य भुगतान का भी विवरण दिया गया है। इसमें कुल देय गन्ना मूल्य 34,571.42 करोड़ रुपये बताया गया है, जिसमें से 32,554.18 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। भुगतान का प्रतिशत 94.17 फीसदी दर्ज है।
Fact Check में सामने क्या आया?
उत्तर प्रदेश में चीनी की उपलब्धता को लेकर फैल रहे ‘चीनी खत्म होने’ या ‘स्टॉक नहीं बचा’ जैसे दावों को उपलब्ध यूपी सरकार के आधिकारिक आंकड़े समर्थन नहीं करते। 20 अगस्त 2026 तक प्रदेश की चीनी मिलों में 179.38 लाख कुंतल स्टॉक दर्ज था। सरकार ने साथ ही जमाखोरी और आर्टिफिशियल शॉर्टेज पर रोक लगाने के लिए स्टॉक लिमिट, फिजिकल वैरिफिकेशन और बाजार निगरानी के निर्देश दिए हैं।




