दावा: समाजवादी पार्टी और समर्थक कह रहे हैं कि योगी सरकार ने लखनऊ के जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) को बेच दिया। वरिष्ठ पत्रकार पंकज झा के पोस्ट में भी इसे विवेक लदानी समूह को सौंपने और करीब 6,000 करोड़ की संपत्ति मात्र 830 करोड़ में देने जैसा बताया गया है।
वास्तविक स्थिति
लखनऊ विकास प्राधिकरण के प्रस्ताव पर 25 अगस्त 2026 को कैबिनेट ने मुहर लगाई। जेपीएनआईसी को वृंदावन बॉटलर्स और रॉकवुड होटल्स के कंसोर्टियम को 35 वर्ष की लीज पर संचालन-रखरखाव के लिए दिया गया। चयन मार्च 2026 के ग्लोबल टेंडर और ओपन बिड से हुआ। हिंदुस्तान टाइम्स ने भी इसे पब्लिश्ड किया है।

रॉकवुड होटल्स द्वारा दुबई एवं न्यूयॉर्क समेत 30 बड़े देशों में होटल श्रृंखलाओं का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। वहीं, वृंदावन बॉटलर्स प्रदेश की सबसे बड़ी बॉटलिंग कंपनी है, जिसका सालाना टर्न ओवर लगभग 400 करोड़ रुपये है।

कैबिनेट निर्णय के मुताबिक:
- जमीन और संपत्ति एलडीए के पास रहेगी।
- म्यूजियम ब्लॉक का संचालन एलडीए के पास सुरक्षित है।
- कंसोर्टियम 2 साल में इंटीरियर, इलेक्ट्रिकल और फायर सहित अवशेष कार्य 200–250 करोड़ अपने खर्च पर पूरा करेगा।
- 25 करोड़ की परफॉर्मेंस गारंटी जमा करनी होगी।
- स्वीकृति पत्र पर एलडीए को 10.11 करोड़ का भुगतान होगा।
- संचालन शुरू होने पर सालाना 6 करोड़ लीज रेंट, हर साल 5 प्रतिशत वृद्धि; अवधि के अंत तक करीब 35 करोड़ प्रति वर्ष।
- निर्माण पर आए करीब 821 करोड़ एलडीए 30 साल में शासन को लौटाएगा।
- आगे सरकारी धन नहीं लगेगा।
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क्यों “बिक्री” नहीं
बिक्री में मालिकाना हक जाता है। यहां लीज, गारंटी, वार्षिक किराया और म्यूजियम पर सरकारी नियंत्रण है। कुछ रिपोर्टों में आया 831 करोड़ एकमुश्त बिक्री मूल्य नहीं, लीज से जुड़ा आंकड़ा है। पंकज झा वाले 12 लाख वर्ग फुट और 50,000 रुपये प्रति वर्ग फुट से 6,000 करोड़ वाला हिसाब भी गलत तुलना है। परिसर करीब 18.6 एकड़ में है और बिल्ट-अप लगभग 10.3–10.5 लाख वर्ग फुट है। यह लीज है, फ्रीहोल्ड बिक्री नहीं।
वर्डिक्ट: गलत / भ्रामक
जेपीएनआईसी बेचा नहीं गया है। यह लंबी अवधि की लीज पर संचालन के लिए दिया गया है।
सपा का आरोप राजनीतिक है, तथ्य नहीं। विवाद लीज की शर्तों पर हो सकता है, मालिकाना हक बेचने पर नहीं।




