Fact Check: सोशल मीडिया पर मेरठ का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पुलिसकर्मी धरने पर बैठे दलित नेता रवि गौतम को वहां से ले जाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि भूख हड़ताल पर बैठे रवि गौतम को पुलिस ने देर रात जबरन धरनास्थल से उठा लिया। हालांकि, FactGiri की पड़ताल में वायरल दावे की तस्वीर कुछ और सामने आई है।
क्या है वायरल दावा?
राजू शर्मा जर्नलिस्ट के एक्स अकाउंट से शेयर किए गए वीडियो में पुलिसकर्मी रवि गौतम को धरनास्थल से ले जाते दिखाई दे रहे हैं। पोस्ट में दावा किया गया कि मेरठ में भूख हड़ताल पर बैठे दलित नेता रवि गौतम को पुलिस ने आधी रात जबरन उठा लिया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, रवि गौतम 20 अगस्त से मेरठ के कमिश्नरी पार्क में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे। इसके बाद उन्होंने 3 सितंबर से भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनकी प्रमुख मांगों में तत्कालीन एसएसपी और आईपीएस अधिकारी अविनाश पांडेय के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को गलत बताते हुए उसे वापस लेने की मांग शामिल थी।
FactGiri की पड़ताल में क्या निकला?
FactGiri की पड़ताल के मुताबिक, पुलिस द्वारा रवि गौतम को जबरन उठाए जाने का दावा भ्रामक है। मेरठ पुलिस के बयान के अनुसार, अनशन पर बैठे रवि गौतम का मेडिकल टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण किया था। जांच में उनकी तबीयत काफी खराब पाई गई और उन्हें तत्काल उपचार की जरूरत बताई गई। इसके बाद स्वास्थ्य को देखते हुए पुलिस उन्हें धरनास्थल से हटाकर अस्पताल ले गई। NBT की एक रिपोर्ट के अनुसार, भी रवि की तबियत बिगड़ने पर मीरठ पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

निष्कर्ष
वायरल दावा: भ्रामक
रवि गौतम को पुलिस द्वारा धरनास्थल से ले जाने का वीडियो वास्तविक है, लेकिन उन्हें जबरन उठाकर ले जाने का दावा सही नहीं है। पुलिस के अनुसार, स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया था।




