Fact Check: सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से एक कथित बयान वाली तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। इसमें नवभारत टाइम्स (NBT) का लोगो लगाकर दावा किया गया है कि योगी आदित्यनाथ ने सवर्ण समाज की आवाज दबाए जाने और आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत बताई है। Factgiri की पड़ताल में में पाया कि वायरल दावा गलत है। सीएम योगी ने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया है। फर्जी बयान को गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।
क्या है वायरल दावा?
शुभम सिंह नाम के फेसबुक यूजर के पोस्ट किए गए वायरल ग्राफिक में लिखा है कि जिस सवर्ण समाज ने 2014 से 2025 तक बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाने में भूमिका निभाई, उसकी आवाज जंतर-मंतर पर दबाई जा रही है। इसके साथ योगी आदित्यनाथ के नाम से आरक्षण व्यवस्था की पुनर्समीक्षा और आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत वाला बयान दिया गया है। ग्राफिक पर NBT का लोगो इस्तेमाल किया गया है।

Factgiri की पड़ताल में क्या निकला?
वायरल दावे की पड़ताल के लिए हमने Google पर “योगी आदित्यनाथ”, “सवर्ण समाज”, “जंतर-मंतर”, “आरक्षण व्यवस्था” और “आर्थिक आधार” जैसे अलग-अलग कीवर्ड से सर्च किया। इस दौरान ऐसी कोई विश्वसनीय न्यूज रिपोर्ट नहीं मिली, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वायरल ग्राफिक में दिया गया बयान दिया हो।
पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए योगी आदित्यनाथ के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी खंगाला गया। वहां भी इस कथित बयान से जुड़ी कोई पोस्ट नहीं मिली।
इसके अलावा, वायरल ग्राफिक में नवभारत टाइम्स का लोगो लगा हुआ है। ऐसे में हमने नवभारत टाइम्स के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स को खंगालना शुरू किया। हमें असली ग्राफिक 31 अगस्त 2026 को नवभारत टाइम्स के फेसबुक पेज पर शेयर किया हुआ मिला। NBT Hindi News ने खुद भी अपने ट्विटर अकाउंट से इस विजुअल ग्राफिक को FAKE बताया है।

निष्कर्ष
वायरल ग्राफिक को NBT की असली खबर या CM योगी आदित्यनाथ का सत्यापित बयान मानने का कोई आधार नहीं मिला। उपलब्ध पड़ताल में न CM योगी के आधिकारिक अकाउंट पर यह बयान मिला और न ही NBT की विश्वसनीय रिपोर्टिंग में इसकी पुष्टि हुई। सीएम योगी के नाम से वायरल हो रहा बयान फेक है। सीएम योगी ने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया है। फर्जी बयान को गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।




