Fact Check: सोशल मीडिया पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से शेयर किया गया सुल्तानपुर का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में श्रीकृष्ण की मूर्ति क्षतिग्रस्त नजर आ रही है। इसे शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि कथित ‘वर्चस्ववादियों’ ने यादव समुदाय को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने से रोकने की कोशिश की और पूजा-अर्चना में बाधा डाली।
लेकिन Factgiri की पड़ताल में इस दावे की तस्वीर कुछ अलग सामने आई। उपलब्ध पुलिस पक्ष के मुताबिक मामला जन्माष्टमी मनाने से रोकने का नहीं, बल्कि सार्वजनिक जगह पर कथित अवैध चबूतरा बनाए जाने और उसके बाद हुए विवाद से जुड़ा है।
क्या है वायरल दावा?
अखिलेश यादव ने 8 सितंबर को X पर वीडियो शेयर करते हुए आरोप लगाया कि सुल्तानपुर में कुछ लोगों ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन में बाधा डाली। उन्होंने इसे आस्था पर हमला बताते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा कुछ सोशल मीडिया चैनलों ने भी इसी वीडियो को इसी दावे के साथ शेयर किया।
Factgiri की पड़ताल में क्या निकला?
Factgiri ने मामले से जुड़े पुलिस पक्ष की पड़ताल की। सुल्तानपुर पुलिस के मुताबिक गोरेलाल यादव की ओर से कथित तौर पर कब्जे की नीयत से चबूतरे का निर्माण कराया गया था और वहीं धार्मिक आयोजन की व्यवस्था की गई थी। सूचना मिलने के बाद राजस्व टीम मौके पर पहुंची और निर्माण को रोकने की कार्रवाई की गई।
पुलिस के अनुसार, गोरेलाल यादव ने निर्माण रोकने की बात कही थी। हालांकि, टीम के लौटने के बाद कथित तौर पर भंडारे का खाना सड़क किनारे फेंका गया और सहयोगियों के साथ अमर्यादित व आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। पुलिस का कहना है कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और मामले में संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।
पड़ताल के दौरान इससे जुड़ा एक अन्य वीडियो भी सामने आया, जिसमें पुलिस कार्रवाई से नाराजगी जताते हुए कथित तौर पर ‘सनातन धर्म मुर्दाबाद’ के नारे लगाए जा रहे हैं। पुलिस ने भी आपत्तिजनक टिप्पणियों की बात कही है।
निष्कर्ष
Factgiri की पड़ताल में वायरल दावा भ्रामक और अधूरा पाया गया। वीडियो को केवल ‘यादव समुदाय को जन्माष्टमी मनाने से रोकने’ की घटना के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि पुलिस के आधिकारिक पक्ष में विवाद की शुरुआत कथित अवैध चबूतरे के निर्माण से बताई गई है।
Verdict: MISLEADING | भ्रामक




