Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें जमीन पर पड़ी एक महिला को कथित तौर पर एक महिला पुलिसकर्मी लात मारती नजर आ रही है। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि पुलिस ने एक महिला के साथ बर्बरता की और लोगों से इसे शेयर कर कार्रवाई की मांग की जा रही है। पोस्ट में यूपी पुलिस के डायल 112 और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी टैग किया गया है।
हालांकि, Factgiri की पड़ताल में सामने आया कि वायरल वीडियो किसी वास्तविक पुलिस कार्रवाई का नहीं, बल्कि शॉर्ट फिल्म की शूटिंग का हिस्सा है।
क्या है वायरल दावा?
X पर ‘समाचार तहलका’ समेत अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स से वीडियो शेयर किया गया। इसमें जमीन पर पड़ी महिला रोती हुई दिखाई देती है और एक महिला पुलिसकर्मी जैसी दिखने वाली महिला उसे लात मारती नजर आती है। वीडियो के साथ लोगों से इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर और रीट्वीट करने की अपील की गई। साथ ही इसे यूपी का मामला बताने की कोशिश की गई।
Factgiri की पड़ताल में क्या निकला?
वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए Factgiri ने वीडियो के अलग-अलग कीफ्रेम निकालकर Google Reverse Image Search और सोशल मीडिया पर सर्च किया। इसके अलावा वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्यों और महिला पुलिसकर्मी के विजुअल्स से जुड़े पुराने सोशल मीडिया पोस्ट भी खंगाले गए।
रिवर्स सर्च के दौरान यही वीडियो ‘CineEdge Media – Behind the Scenes’ नाम के फेसबुक पेज पर मिला। वहां इसे फिल्म शूटिंग से जुड़ा वीडियो बताया गया था। पोस्ट में #shortfilmseries और #uncut जैसे हैशटैग भी इस्तेमाल किए गए हैं।
पेज की प्रोफाइल जानकारी से भी पता चलता है कि वहां फिल्मों के एक्टिंग सीन और Behind the Scenes फुटेज शेयर किए जाते हैं। इसी तरह CineEdge Media के यूट्यूब कंटेंट में भी शॉर्ट फिल्में दिखाई देती हैं। यानी वायरल वीडियो में दिखाई दे रही ‘पुलिसकर्मी’ असल में शूटिंग के दौरान किरदार निभा रही थी।
दिल्ली की महिला पत्रकारों के मामले से भी जोड़ा गया
इसी वीडियो को हाल में दिल्ली के साकेत थाने में दो महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान के साथ कथित बदसलूकी के मामले से भी जोड़कर शेयर किया जा रहा है। 3 सितंबर 2026 को दोनों पत्रकारों ने पुलिस पर हिरासत में मारपीट के आरोप लगाए थे।
निष्कर्ष
वायरल वीडियो को महिला पुलिसकर्मी द्वारा पीड़िता के साथ मारपीट का बताकर शेयर किया जा रहा है, लेकिन जांच में इसकी शॉर्ट फिल्म की शूटिंग से जुड़ी कड़ी सामने आई है। वीडियो को वास्तविक पुलिस अत्याचार बताकर शेयर करना भ्रामक है।
Factgiri Verdict: भ्रामक दावा/ MISLEADING




