Fact Check: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर समाजवादी पार्टी मीडिया सेल समेत कई यूजर्स ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में उन्हें मंदिर परिसर में जमीन पर बैठकर मछली और चावल खाते देखा जा सकता है। पोस्ट के जरिए दावा किया जा रहा है कि उन्होंने पवित्र काली मंदिर के भीतर बैठकर मछली खाई। हालांकि, FactGiri की पड़ताल में इस दावे की तस्वीर अधूरी सामने आई है।
क्या है वायरल दावा?
वायरल पोस्ट में UP के सीएम योगी आदित्यनाथ को तंज कसते हुए कहा जा रहा है कि जो लोग दूसरे राज्यों में मांस-मछली की दुकानों पर पाबंदी की बात करते हैं, उन्हीं के नेता मंदिर के अंदर बैठकर मछली खा रहे हैं। इस दावे के साथ वीडियो को धार्मिक मर्यादा से जोड़कर पेश किया जा रहा है।
FactGiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह वीडियो कोलकाता के ऐतिहासिक कालीघाट मंदिर का है। सुवेंदु अधिकारी ने कौशिकी अमावस्या के अवसर पर मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद वहां का पारंपरिक भोग ग्रहण किया। उनकी थाली में बसंती पुलाव, तली हुई मछली और मछली का सिर शामिल था।

यानी वीडियो में मछली खाना दिखाई देना सही है, लेकिन इसे सामान्य तौर पर मंदिर में जाकर मनमाने ढंग से मछली खाने के रूप में पेश करना भ्रामक है। कालीघाट मंदिर की भोग परंपरा दूसरे कई हिंदू मंदिरों से अलग है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यहां देवी काली की पूजा परंपरा में मछली समेत मांसाहारी भोग का भी प्रचलन रहा है।
इस पर सुवेंदु अधिकारी का क्या बयान था?
यह विवाद तब और गरमाया जब बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर बाबा) ने दुर्गा पूजा में मांसाहार को लेकर टिप्पणी की थी। इसके जवाब में सुवेंदु अधिकारी ने मंदिर का प्रसाद ग्रहण करने के बाद मीडिया से कहा- मैं एक जन्मजात सनातनी हिंदू हूँ। महाअष्टमी और कार्तिक के पूरे पवित्र महीने में मैं पूरी तरह सात्विक (शाकाहारी) भोजन करता हूँ। लेकिन जब बात मां काली के भोग की आती है, तो बंगाली संस्कृति और शाक्त परंपरा के अनुसार मैं उस ‘मछली महाप्रसाद’ को सहर्ष स्वीकार करता हूँ। इससे हमारी सनातनी परंपराएं कमजोर नहीं होतीं, बल्कि यह हमारी विविधता का सम्मान है।
निष्कर्ष
वायरल वीडियो असली है, लेकिन उसके साथ किया जा रहा दावा अधूरा और भ्रामक है। सुवेंदु अधिकारी ने कालीघाट मंदिर में पूजा के बाद मंदिर की परंपरा के अनुसार परोसा गया मछली वाला भोग ग्रहण किया था।
FACTGIRI VERDICT: MISLEADING




