Fact Check: 13 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर की रिटायरमेंट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को बड़ा झटका दिया है। पोस्ट में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने रिटायरमेंट का फैसला पलट दिया और सरकार पर भारी जुर्माना भी लगाया। वीडियो में भी ‘सरकार की सुप्रीम कोर्ट में हार’ और ‘पैसे भी मिलेंगे’ जैसे टेक्स्ट दिखाए गए।
Factgiri की पड़ताल में यह दावा गलत निकला। सुप्रीम कोर्ट ने अमिताभ ठाकुर की रिटायरमेंट रद्द नहीं की है और न ही इस मामले में योगी सरकार पर कोई जुर्माना लगाया है। वायरल पोस्ट में एक अलग अधिकारी के मामले को अमिताभ ठाकुर के केस से जोड़ दिया गया है।
क्या है वायरल दावा?
X पर @IPSinghSp से शेयर किए गए पोस्ट में लिखा गया कि “जांबाज IPS श्री अमिताभ ठाकुर” ने सुप्रीम कोर्ट में योगी आदित्यनाथ सरकार को हरा दिया और कोर्ट ने जबरिया रिटायरमेंट का फैसला पलटते हुए सरकार पर भारी जुर्माना लगाया।
दावे को सही साबित करने के लिए वीडियो में भी सुप्रीम कोर्ट में सरकार की हार और पैसे मिलने का दावा किया गया।
अमिताभ ठाकुर की रिटायरमेंट का पूरा मामला क्या है?
अमिताभ ठाकुर 1992 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी थे। 23 मार्च 2021 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें जनहित में सेवा जारी रखने के लिए अनुपयुक्त बताते हुए समय से पहले सेवानिवृत्त कर दिया था। उस समय उनकी सामान्य सेवानिवृत्ति 2028 में होनी थी। इसके बाद ठाकुर ने अपनी अनिवार्य सेवानिवृत्ति को CAT की लखनऊ बेंच में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने जून 2026 में क्या कहा था?
The Print Media के अनुसार, 12 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने अमिताभ ठाकुर के मामले में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को उनके खिलाफ लंबित चार विभागीय जांच छह महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया था। कोर्ट का आदेश रिटायरमेंट रद्द करने या सरकार पर जुर्माना लगाने से संबंधित नहीं था।
सितंबर में भी नहीं पलटा रिटायरमेंट का फैसला
इसके बाद 8 सितंबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने CAT को अमिताभ ठाकुर की अनिवार्य सेवानिवृत्ति को चुनौती देने वाली लंबित याचिका पर जल्द फैसला करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने साफ किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं दिया है। यानी कोर्ट ने यह नहीं कहा कि अमिताभ ठाकुर की रिटायरमेंट गलत थी या उसे रद्द किया जाता है।

फिर 15 लाख रुपये वाला मामला किसका है?
यहीं से वायरल दावे में बड़ा भ्रम पैदा हुआ। 9 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय व्यापार सेवा (ITS) के अधिकारी एसएस दास की अनिवार्य सेवानिवृत्ति रद्द की थी। कोर्ट ने उनकी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए ₹9 लाख मुआवजा और मुकदमे की लागत के रूप में ₹6 लाख देने का निर्देश दिया। साथ ही उन्हें सम्मानजनक विदाई देने और बकाया सेवा लाभ बहाल करने के निर्देश भी दिए गए। यानी 15 लाख वाला फैसला अमिताभ ठाकुर का नहीं, बल्कि ITS अधिकारी एसएस दास का है।

Factgiri का निष्कर्ष
वायरल X पोस्ट में दो अलग-अलग मामलों को मिलाकर एक गलत कहानी बनाई गई है। अमिताभ ठाकुर की रिटायरमेंट के खिलाफ मामला अभी कानूनी प्रक्रिया में है। सुप्रीम कोर्ट ने जून में केवल लंबित विभागीय जांच छह महीने में पूरी करने का निर्देश दिया था और सितंबर में हाईकोर्ट ने CAT को मामले पर जल्द फैसला करने को कहा।
Verdict: FALSE | दावा गलत




