Fact Check: बलिया के पंदह ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय डकिनगंज के पुराने भवन को बुलडोजर से गिराए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वीडियो शेयर कर सरकार पर स्कूलों को तोड़ने का आरोप लगाया। वीडियो में भवन बाहर से खड़ा दिखाई देता है, जिसके आधार पर इसे ठीक-ठाक स्कूल बताया जा रहा है।
लेकिन Factgiri की पड़ताल में सामने आया कि जिस भवन को वायरल पोस्ट में सही हालत में बताया जा रहा है, उसे शिक्षा विभाग पहले ही जर्जर घोषित कर चुका था। विभाग के मुताबिक भवन करीब 36 साल पुराना था और बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से इस्तेमाल के योग्य नहीं रह गया था।
क्या है वायरल दावा?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बलिया के डकिनगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय के पुराने भवन को जेसीबी से गिराते हुए दिखाया गया है। वीडियो शेयर करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा और इसे स्कूलों को बुलडोजर से गिराने की कार्रवाई के तौर पर पेश किया।
वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठने लगा कि आखिर एक सरकारी स्कूल की इमारत को क्यों तोड़ा गया और क्या वाकई भवन इतना खराब था कि उसे गिराना जरूरी था?
Factgiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
इस मामले में बलिया के बेसिक शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन का पक्ष वायरल दावे से अलग है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह के मुताबिक, डकिनगंज प्राथमिक विद्यालय का भवन 1990 में बनाया गया था और उसमें सिर्फ दो कमरे थे। करीब 36 साल पुराने इस भवन की हालत बेहद जर्जर हो चुकी थी। विभाग ने इसी आधार पर इसे हटाने की प्रक्रिया शुरू की।

शिक्षा विभाग का कहना है कि भवन को हटाने से पहले विभागीय औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद जर्जर भवन के मलबे की नीलामी की प्रक्रिया भी कराई गई। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, निर्धारित प्रक्रिया में करीब 53 हजार रुपये तक बोली पहुंची, लेकिन बाद में किसी ने आगे बोली नहीं लगाई। इसके बाद भवन को हटाने की कार्रवाई की गई।
यानी मामला अचानक किसी चलते-फिरते स्कूल पर बुलडोजर चलाने का नहीं था, बल्कि विभाग के अनुसार पुराने और असुरक्षित भवन को हटाकर उसी जगह नया भवन तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ा है।
बच्चों की पढ़ाई पर क्या असर पड़ा?
उत्तर प्रदेश सूचना विभाग की ओर से जारी स्पष्टीकरण के मुताबिक, पुराने भवन को असुरक्षित होने के कारण खाली कराया गया था और बच्चों की पढ़ाई परिसर में मौजूद अन्य सुरक्षित कमरों में जारी थी। विभाग का कहना है कि पुराने भवन की जगह नया भवन बनाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
इसलिए केवल जेसीबी से पुराने भवन को गिराए जाने का वीडियो देखकर यह निष्कर्ष निकालना कि “सरकार ने एक ठीक-ठाक स्कूल को तोड़ दिया”, उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी से पुष्ट नहीं होता।
नीलामी और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया भी हुई
विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजीव कुमार और खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार चौबे के हवाले से अमर उजाला ने बताया कि भवन पहले ही जर्जर घोषित किया जा चुका था और उसे हटाने से पहले नीलामी की प्रक्रिया पूरी की गई थी। विभाग के अनुसार, मलबे को हटाने के बाद उसी परिसर में नए भवन का निर्माण प्रस्तावित है।

Factgiri का निष्कर्ष
वायरल वीडियो में बलिया के डकिनगंज प्राथमिक विद्यालय का पुराना भवन गिराया जाना वास्तविक है, लेकिन इसे “अच्छे और सही स्कूल को सरकार ने बुलडोजर से तोड़ दिया” बताना भ्रामक है।
Verdict: MISLEADING | भ्रामक




