Fact Check : सोशल मीडिया पर नगीना सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह अस्पताल के बेड पर लेटे नजर आ रहे हैं। इसे हाल की घटना बताते हुए दावा किया जा रहा है कि डॉ. रोहिणी घावरी के भारत लौटने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कहने के बाद चंद्रशेखर आजाद की तबीयत बिगड़ गई। कुछ पोस्ट में तो यह भी दावा किया जा रहा है कि अज्ञात हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी।
Factgiri की पड़ताल में वायरल दावे की तस्वीर अलग सामने आई। वायरल वीडियो हाल का नहीं, बल्कि करीब सात साल पुराना यानी मार्च 2019 का है। इसका मौजूदा विवाद या किसी कथित हमले से कोई संबंध नहीं मिला।
क्या है वायरल वीडियो का दावा?
13 सितंबर 2026 को फेसबुक यूजर ‘सवर्ण आर्मी प्रमोद शुक्ला’ ने वीडियो शेयर किया। पोस्ट में चंद्रशेखर आजाद की तबीयत खराब होने को डॉ. रोहिणी घावरी के भारत लौटने से जोड़ते हुए आपत्तिजनक दावा किया गया।
इसी तरह कुछ अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में वीडियो को चंद्रशेखर आजाद पर कथित हमले से जोड़कर शेयर किया गया। हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई ताजा घटना या विश्वसनीय रिपोर्ट सामने नहीं रखी गई।
Factgiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
वायरल वीडियो के कीफ्रेम निकालकर रिवर्स इमेज सर्च करने पर यही फुटेज Patrika Noida के आधिकारिक YouTube चैनल पर मिला। यह वीडियो 13 मार्च 2019 को अपलोड किया गया था। वीडियो के संदर्भ से पता चलता है कि उस समय चंद्रशेखर आजाद की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें मेरठ के अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इसके बाद 2019 की संबंधित खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट को खंगाला गया। दैनिक जागरण की 12 मार्च 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक, आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में चंद्रशेखर आजाद को देवबंद में हिरासत में लिया गया था। हिरासत के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रिहा किया गया और इलाज के लिए मेरठ ले जाया गया।
चंद्रशेखर आजाद के आधिकारिक X अकाउंट की 12 मार्च 2019 की पोस्ट में भी उनकी तबीयत खराब होने और उन्हें मेरठ के आनंद अस्पताल ले जाने की जानकारी दी गई थी। यानी वायरल वीडियो के तार सीधे 2019 की घटना से जुड़ते हैं, न कि सितंबर 2026 की किसी घटना से।
रोहिणी घावरी विवाद से वीडियो का क्या संबंध?
डॉ. रोहिणी घावरी और चंद्रशेखर आजाद से जुड़ा विवाद सितंबर 2026 में उनके भारत लौटने के बाद फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में आया। इसी दौरान पुराने अस्पताल के वीडियो को नए विवाद से जोड़कर शेयर किया गया।
लेकिन पुराने वीडियो को मौजूदा विवाद से जोड़ने का कोई आधार नहीं मिला। इसी तरह चंद्रशेखर आजाद को हाल में गोली मारे जाने के दावे की पुष्टि भी उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
Factgiri Verdict: MISLEADING | भ्रामक
वायरल वीडियो मार्च 2019 में चंद्रशेखर आजाद की तबीयत बिगड़ने के बाद मेरठ के अस्पताल में भर्ती होने के समय का है। यानी वीडियो असली है, लेकिन उसकी तारीख और संदर्भ गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।




