Fact Check: महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के बाहर ठेले-रेहड़ी और गुमटियां हटाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में दुकानदार हाथ जोड़कर मोहलत मांगते और महिलाएं रोती नजर आ रही हैं। यूपी कांग्रेस ने इसे गरीबों की रोजी-रोटी पर बुलडोजर और बिना चेतावनी की कार्रवाई बताया। लेकिन FactGiri की पड़ताल में यह दावा भ्रामक मिला। झांसी पुलिस के मुताबिक दुकानदारों को पहले ही कई बार अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी गई थी और कार्रवाई से एक दिन पहले भी सूचना दी गई थी।
क्या है वायरल वीडियो का दावा?
18 सितंबर को यूपी कांग्रेस के आधिकारिक X हैंडल @INCUttarPradesh और 19 सितंबर को समाजवादी मीडिया सेल के X हैंडल ने आज तक के वीडियो को शेयर करते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। कैप्शन में इसे ‘गरीब के पेट पर चोट’ और ‘रोजगार छीनने का बुलडोजर मॉडल’ बताया गया।
FactGiri की पड़ताल में क्या मिला?
मामला 15 सितंबर को नवाबाद थाना क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज के गेट नंबर 1 से 3 तक चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान का है। नगर निगम, यातायात पुलिस और थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने सड़क किनारे लगे ठेले-रेहड़ी और गुमटियां हटाईं। कार्रवाई के दौरान तीन बुलडोजर और पुलिस बल मौजूद था।
झांसी पुलिस ने क्या कहा?
झांसी पुलिस के आधिकारिक बयान के मुताबिक, दुकानदारों को नगर निगम और यातायात पुलिस की ओर से पहले भी अतिक्रमण न करने की चेतावनी दी गई थी। कार्रवाई से एक दिन पहले भी उन्हें सूचना दी गई थी। पुलिस के अनुसार सड़क पर अतिक्रमण के कारण यातायात प्रभावित हो रहा था।

पुलिस ने यह भी बताया कि कुछ दुकानदारों ने विरोध किया। वीडियो में दिख रही महिला के बेटे ने जेसीबी के सामने पहुंचकर विरोध किया और वीडियो बनाया था। उसका मोबाइल बाद में वापस कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक मौके पर कानून-व्यवस्था सामान्य रही।
Aaj Tak की रिपोर्ट में भी नगर निगम के अतिक्रमण प्रभारी के हवाले से कहा गया कि कार्रवाई से एक दिन पहले लोगों को सूचना दी गई थी और पेट्रोलिंग के दौरान भी उन्हें हटने के लिए कहा जाता रहा था।

निष्कर्ष
वीडियो में दुकानदारों का विरोध और उनकी परेशानी वास्तविक है, लेकिन इसे ‘बिना किसी चेतावनी के अचानक बुलडोजर चला दिया’ बताना सही नहीं है।
FactGiri Verdict: भ्रामक




