Factgiri Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पुलिसकर्मी बुजुर्ग को डंडे से पीटता और घसीटकर ले जाता दिखाई दे रहा है। वीडियो को शेयर करते हुए इसे उत्तर प्रदेश की मौजूदा स्थिति से जोड़कर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। एक पोस्ट में इसे शेयर करते हुए लिखा गया, “क्या सच में गरीब होना अपराध है! देखिये कैसे गरीब बेसहारा के ऊपर लाठी चलायी जा रही है।” हालांकि, FactGiri की पड़ताल में यह दावा भ्रामक निकला। वायरल वीडियो मौजूदा घटना का नहीं, बल्कि अप्रैल 2017 के लखनऊ का है।
FactGiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
वायरल वीडियो के की-फ्रेम और संबंधित कीवर्ड की जांच करने पर आजतक की 29 अप्रैल 2017 की रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, घटना लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन की थी। रेलवे पुलिस के अधिकारी स्टेशन पर अतिक्रमण हटाने पहुंचे थे। इसी दौरान एक बुजुर्ग रिक्शा चालक और पुलिसकर्मी के बीच विवाद हो गया।

रिपोर्ट में आरोपी सिपाही की पहचान विश्वजीत सिंह के रूप में की गई थी। वीडियो में वह बुजुर्ग रिक्शा चालक के साथ मारपीट करता और उसे पकड़कर चौकी की ओर ले जाता नजर आया था।
2017 में ही हो चुकी थी पुलिस कार्रवाई
अमर उजाला की 29 अप्रैल 2017 की रिपोर्ट भी इसी घटना की पुष्टि करती है। रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ जंक्शन पर बुजुर्ग रिक्शा चालक मदन शाह के साथ मारपीट हुई थी। मामला सामने आने के बाद जीआरपी अधिकारियों ने आरोपी सिपाही विश्वजीत को निलंबित कर दिया था। चौकी प्रभारी के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही गई थी।

यानी वीडियो में दिख रही मारपीट वास्तविक घटना की है, लेकिन इसे 2026 की घटना बताना सही नहीं है। यह घटना योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के शुरुआती दौर यानी अप्रैल 2017 की है।
FactGiri का निष्कर्ष
दावा: योगी सरकार के मौजूदा कार्यकाल में पुलिसकर्मी बुजुर्ग की बेरहमी से पिटाई कर रहा है।
FactGiri Verdict: भ्रामक
FactGiri की पड़ताल में सामने आया कि वायरल वीडियो 2017 में लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर हुई घटना का है। उस समय अतिक्रमण हटाने के दौरान बुजुर्ग रिक्शा चालक से मारपीट करने वाले सिपाही पर कार्रवाई भी की गई थी। इसलिए करीब नौ साल पुराने वीडियो को मौजूदा घटना बताकर शेयर करना भ्रामक है।




