Factgiri Fact Check : सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के महराजगंज कचहरी परिसर का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दो महिलाओं के साथ कुछ युवक मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि अदालत परिसर के अंदर महिलाओं को बेरहमी से पीटा गया, जबकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे। लेकिन जब Factgiri ने वायरल वीडियो और इस घटना से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स की पड़ताल की, तो तस्वीर कुछ अलग सामने आई।
क्या है वायरल वीडियो का दावा?
वायरल वीडियो को सोशल मीडिया यूजर रितु चौधरी ने शेयर करते हुए लिखा कि उत्तर प्रदेश में गुंडाराज चरम पर है। पोस्ट में दावा किया गया कि अदालत के अंदर एक महिला को बेरहमी से पीटा जा रहा है और पुलिस मूक बनकर खड़ी है।
इसी दावे के साथ वीडियो को कई अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने भी शेयर किया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए।
Factgiri की पड़ताल में क्या निकला?
Factgiri ने वायरल वीडियो को ध्यान से देखा और घटना से जुड़ी रिपोर्ट्स की पड़ताल की। जांच में यह पुष्टि हुई कि वायरल वीडियो महराजगंज के न्यायालय परिसर का ही है।
वीडियो में दो महिलाओं और कुछ पुरुषों के बीच मारपीट होती दिखाई देती है। हालांकि, वीडियो को ध्यान से देखने पर यह भी नजर आता है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी और अधिवक्ता बीच-बचाव करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
यानी वायरल वीडियो के आधार पर यह दावा करना सही नहीं है कि पुलिस पूरी घटना के दौरान केवल मूकदर्शक बनी रही और उसने कोई हस्तक्षेप नहीं किया।
क्या है पूरा मामला?
इस घटना को लेकर हिन्दुस्तान की 25 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला परिवार न्यायालय में भरण-पोषण से जुड़े मुकदमे की तारीख पर पहुंची थी। इसी दौरान महिला और उसके पति पक्ष के लोगों के बीच विवाद हो गया।

महिला ने अपने पति और अन्य लोगों पर मारपीट करने के साथ गला दबाने का आरोप लगाया था। पुलिस के मुताबिक, शिकायत और सामने आए वीडियो के आधार पर मामले में मुकदमा दर्ज किया गया और दो लोगों को हिरासत में लिया गया।
इसके बाद 26 सितंबर को अमर उजाला की रिपोर्ट में बताया गया कि पुलिस ने आरोपी पति और उसके रिश्तेदार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के दौरान न्यायालय परिसर में तैनात पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया था।

निष्कर्ष
महराजगंज कचहरी परिसर में महिलाओं के साथ मारपीट की घटना वास्तविक है। मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई भी की और आरोपियों की गिरफ्तारी की गई।
लेकिन सोशल मीडिया पर किया जा रहा यह दावा कि पुलिस मौके पर मौजूद होकर भी मूकदर्शक बनी रही और उसने कोई कार्रवाई नहीं की, उपलब्ध घटनाक्रम से मेल नहीं खाता।
वायरल पोस्ट में घटना के एक हिस्से को दिखाकर पुलिस की भूमिका को लेकर अधूरा और भ्रामक संदर्भ पेश किया जा रहा है।
Fact Check: भ्रामक दावा




