Factgiri Fact Check: सोशल मीडिया पर वाराणसी के शास्त्रीघाट से UGC विरोधी अनशनकारियों की गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है। FactGiri की पड़ताल में यह दावा भ्रामक निकला। पुलिस के मुताबिक, तीन अनशनकारियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, बल्कि तबीयत बिगड़ने पर CMO की रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
क्या है पूरा मामला?
शास्त्रीघाट पर UGC एक्ट में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में प्रदर्शन पहले भी हुआ था। 29 अगस्त को यहां प्रदर्शन की रिपोर्ट अमर उजाला ने भी प्रकाशित की थी। इसके बाद गौतम मिश्रा बल्लू, सनातनी चंदन बाबा, बृजेश मिश्रा समेत कुछ लोग आमरण अनशन पर बैठे थे। 26-27 सितंबर की रात पुलिस मौके पर पहुंची और अनशन स्थल का टेंट हटाया गया। इसके बाद तीन अनशनकारियों को अस्पताल ले जाया गया।
FactGiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
मामले में सबसे अहम जानकारी वाराणसी पुलिस की ओर से सामने आई। DCP Varuna Zone के आधिकारिक बयान के मुताबिक, मुख्य चिकित्साधिकारी वाराणसी की रिपोर्ट के आधार पर तीनों अनशनकारियों की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
पुलिस ने अपने स्पष्टीकरण में साफ कहा कि मामले में किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं की गई है। वहीं अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, बृजेश मिश्रा को दीनदयाल अस्पताल जबकि अन्य अनशनकारियों को रामनगर और शिवपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी पुलिस को खुद उनके परिजनों ने दी थी। दूसरी ओर हिन्दुस्तान ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस द्वारा रात में अनशनकारियों को अस्पताल पहुंचाए जाने की जानकारी दी है।

निष्कर्ष
वायरल दावे में रात में अनशनकारियों को मौके से हटाए जाने और अस्पताल पहुंचाए जाने की बात सही है, लेकिन इसे गिरफ्तारी या दो लोगों के लापता होने के रूप में पेश करना भ्रामक है।
FactGiri निष्कर्ष: भ्रामक
FactGiri की पड़ताल में सामने आया कि तीन अनशनकारियों को स्वास्थ्य खराब होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।




