Factgiri Fact Check: अभिगांव की गौशाला में गोवंशों की मौत का मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानबाजी में दावा किया गया कि 50 से 60 गोवंशों की जान चली गई और योगी सरकार सो रही है। कुछ नेताओं और विपक्षी नेताओं ने सरकार पर गौशालाओं की बदहाली को लेकर सवाल भी उठाए। FactGiri ने जब वायरल दावे और प्रशासन की कार्रवाई को साथ रखकर पड़ताल की तो तस्वीर कुछ अलग सामने आई।
50-60 मौतों का दावा, प्रशासन ने कितनी बताईं?
म्याऊं ब्लॉक के अभिगांव की अस्थायी गौशाला में करीब 428 गोवंश दर्ज थे। घटना के बाद हिंदू संगठनों और अन्य लोगों की ओर से 40 से 50, जबकि सोशल मीडिया पर 50 से 60 गोवंशों की मौत का दावा किया गया।
लेकिन प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, करीब 60 गोवंश बीमार मिले थे। इनमें छह पहले से मृत थे और इलाज के दौरान 14 की मौत हुई। यानी प्रशासन ने कुल 20 मौतों की पुष्टि की।
क्या सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की?
यहीं इस मामले का दूसरा अहम पहलू सामने आता है। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, जिला प्रशासन ने जांच के लिए कमेटी गठित की। जांच के बाद अभिगांव और सालारपुर की संबंधित गौशालाओं के ग्राम पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया। पशु चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया और तत्कालीन प्रभारी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई।
इसके अलावा दोनों गौशालाओं का संचालन करने वाले एनजीओ को ब्लैकलिस्ट किया गया और संचालकों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई। अभिगांव मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी की भी जानकारी सामने आई है। दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, अभिगांव गौशाला के संचालक प्रियंक कौशिक और केयरटेकर दानवीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।

FactGiri Verdict – भ्रामक/MISLEADING
50-60 गोवंशों की मौत का दावा प्रशासनिक आंकड़ों से साबित नहीं होता। प्रशासन ने 20 मौतों की पुष्टि की है। वहीं, यह कहना भी सही नहीं है कि मामले में सरकार या प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। रिकॉर्ड में FIR, गिरफ्तारी, ग्राम पंचायत सचिवों का निलंबन, अधिकारियों पर कार्रवाई और एनजीओ को ब्लैकलिस्ट करने जैसे कदम दर्ज हैं।




