Factgiri Fact Check: सहारनपुर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने इसे शेयर करते हुए आरोप लगाया कि महानगर अध्यक्ष मनीष त्यागी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने सत्ता के इशारे पर उनके साथ बर्बरता की और कपड़े तक फाड़ दिए।
FactGiri की पड़ताल में यह दावा एकतरफा और भ्रामक मिला। उपलब्ध रिपोर्टों और पुलिस के आधिकारिक पक्ष के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्कामुक्की हुई थी और पुतला फूंकने की कोशिश के साथ कलेक्ट्रेट गेट पर भी हंगामा हुआ था।
कलेक्ट्रेट गेट पर क्या हुआ था?
घटना 28 सितंबर 2026 की है। कांग्रेस कार्यकर्ता ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सहारनपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, कलेक्ट्रेट में जाने को लेकर पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक हुई। महानगर अध्यक्ष मनीष त्यागी गेट पर चढ़कर नारेबाजी करते भी नजर आए।
सहारनपुर पुलिस ने क्या बताया?
इस मामले में सबसे अहम सबूत सहारनपुर पुलिस का आधिकारिक बयान है। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन बिना अनुमति किया गया और इस दौरान उग्र नारेबाजी, पुतला फूंकने का प्रयास, सड़क जाम कर सार्वजनिक मार्ग बाधित करने तथा पुलिस के साथ अभद्रता के आरोप लगे। पुलिस के अनुसार मामले में FIR दर्ज की गई और मनीष त्यागी समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया।

गिरफ्तारी क्यों हुई?
मामले में पुलिस ने 10 नामजद और 25 से 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। मनीष त्यागी और हरिओम मिश्रा को हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की गई। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में पुलिस की ओर से प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम के आधार पर कार्रवाई की जानकारी दी गई है। इसलिए इसे सिर्फ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नेताओं को पुलिस ने उठा लिया, कहना भ्रा्मक है।

FactGiri Verdict: भ्रामक
FactGiri की पड़ताल में सामने आया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्कामुक्की, कलेक्ट्रेट गेट पर चढ़ने और पुतला फूंकने की कोशिश हुई थी। पुलिस से अभद्रता और अभद्र भाषा के प्रयोगी की भी हुई है। इसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर कार्रवाई की, इसे सत्ता के इशारे पर कार्रवाई का दावा भ्रामक और गलत है।




