Factgiri Fact Check: सोशल मीडिया पर “यूपी में 2017 से 2025 तक एनकाउंटर किए गए बाहुबलियों की सूची” लिखकर 38 नामों वाला एक ग्राफिक वायरल है। सूची में विकास दुबे, अमर दुबे, प्रभात मिश्रा समेत कई नाम शामिल हैं। इसे शेयर करते हुए ऐसा नैरेटिव बनाया जा रहा है कि योगी सरकार के दौरान पुलिस एनकाउंटर में एक खास जाति, विशेष रूप से ब्राह्मणों को निशाना बनाया गया।
FactGiri की पड़ताल में यह सूची अधूरी, चयनात्मक और कई जगह तथ्यात्मक रूप से गलत निकली।
आधिकारिक आंकड़े क्या बताते हैं?
Hindustan Times की 4 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2017 से अगस्त 2026 तक पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए कथित अपराधियों की संख्या बढ़कर 314 है। अकेले 2026 के पहले आठ महीनों में 49 encounter deaths दर्ज की गईं। इस दौरान 18 पुलिसकर्मियों की भी मौत हुई और 1,852 घायल हुए।

यानी वायरल ग्राफिक में दिखाए गए 38 नाम पूरी encounter list नहीं हैं। उदाहरण के लिए मई तक अकेले मेरठ जोन में 97, वाराणसी जोन में 29, आगरा जोन में 24 और बरेली जोन में 21 कथित अपराधियों की मुठभेड़ में मौत दर्ज थी।
वायरल सूची में तथ्यात्मक गलती भी
ग्राफिक में सातवें नंबर पर कमलेश तिवारी, लखनऊ का नाम भी “एनकाउंटर किए गए बाहुबलियों” में शामिल है। यह गलत है। कमलेश तिवारी पुलिस एनकाउंटर में नहीं मारे गए थे। 18 अक्टूबर 2019 को लखनऊ स्थित उनके घर में उनकी हत्या की गई थी। मामले में पुलिस ने हत्या की FIR दर्ज की और बाद में आरोपियों को गिरफ्तार किया।

क्या जाति देखकर हुए एनकाउंटर?
उपलब्ध आधिकारिक encounter statistics मुठभेड़ों को जातिवार सूची के रूप में प्रस्तुत नहीं करते। । ABP News ने 2017 से 2023 के बीच मारे गए 183 लोगों के उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए बताया था कि इनमें 61 मुस्लिम, 18 ब्राह्मण, 16 ठाकुर, 15 जाट-गुर्जर, 14 यादव, 13 दलित, 3 आदिवासी, 2 सिख, 7 अन्य OBC और 34 अन्य शामिल थे। यानी उस dataset में भी मारे गए लोग केवल एक जाति से नहीं थे।
Hindustan Times के विश्लेषण के अनुसार इस अवधि में मारे गए 49 लोगों में 11 मुस्लिम नाम, 4 यादव surname और 5 Singh surname वाले लोग थे; शेष में ब्राह्मण, जाट, गुर्जर समेत दूसरे समूह शामिल थे।

FactGiri का निष्कर्ष
वायरल सूची अधूरी और चयनात्मक है। व्यापक आंकड़ों में ब्राह्मणों के साथ मुस्लिम, यादव, ठाकुर, दलित, जाट-गुर्जर और अन्य समुदायों के लोग भी शामिल हैं। इसलिए 38 चुनिंदा नामों के आधार पर ‘ब्राह्मणों को ही या विशेष रूप से एनकाउंटर में निशाना बनाया गया’ वाला नैरेटिव उपलब्ध आंकड़ों से साबित नहीं होता।
FACTGIRI VERDICT: भ्रामक और एजेंडा आधारित




