Factgiri Fact Check: उत्तर प्रदेश में किसानों की समस्याओं को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चार सवाल उठाए हैं। क्या किसानों को डीएपी मिल रही है? क्या उनकी पैदावार का उचित मूल्य दिया जा रहा है? क्या बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई हुई और छुट्टा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए क्या व्यवस्था की गई? FactGiri ने इन सवालों की पड़ताल सरकारी आंकड़ों और हिंदुस्तान टाइम्स, दैनिक जागरण, टाइम्स ऑफ इंडिया तथा अन्य समाचार संस्थानों की रिपोर्टों के आधार पर की।
क्या प्रदेश में DAP की कमी है?
हिंदुस्तान टाइम्स की जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया था कि 28 जुलाई को प्रदेश में 4.81 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 14.77 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 4.90 लाख मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध था। खरीफ 2026 के लिए सरकार ने साफ कहा कि यूरिया, डीएपी या एनपीके की कोई कमी नहीं है। अक्टूबर 2026 में भी कृषि मंत्री ने दोबारा पुष्टि की कि रबी सीजन के लिए पर्याप्त स्टॉक है।

क्या किसानों को फसल का सही मूल्य मिल रहा है?
9 अक्टूबर 2026 को योगी कैबिनेट ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए मोटे अनाज की सरकारी खरीद नीति को मंजूरी दी। दैनिक जागरण और लाइव हिन्दुस्तान के अनुसार मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2,410, बाजरा ₹2,900 और ज्वार ₹4,023 से ₹4,073 प्रति क्विंटल निर्धारित है। धान खरीद का लक्ष्य 65 लाख मीट्रिक टन रखा गया है। किसानों को सरकारी केंद्रों पर उपज बेचने के बाद 48 घंटे के भीतर बैंक खाते में भुगतान करने का निर्देश है।

क्या बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा दिया गया?
टाइम्स ऑफ इंडिया और दैनिक जागरण की सितंबर 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक राहत आयुक्त कार्यालय के आंकड़ों में 1 अप्रैल से 18 सितंबर के बीच विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को ₹249.76 करोड़ की सहायता वितरित किए जाने की जानकारी दी गई।
इसमें 1.16 लाख किसानों को फसल नुकसान के लिए ₹72.31 करोड़, जबकि क्षतिग्रस्त मकानों के लिए ₹15.09 करोड़ की सहायता शामिल थी। यह पूरी राशि केवल बाढ़ मुआवजे की नहीं, बल्कि विभिन्न आपदाओं की संयुक्त राहत राशि है।

छुट्टा पशुओं के लिए क्या व्यवस्था है?
डीडी इंडिया की 30 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 7,700 से अधिक गोआश्रय स्थलों और 16 लाख से अधिक गोवंश के संरक्षण की जानकारी दी। मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत पशुपालकों को प्रति गोवंश ₹1,500 मासिक सहायता दी जाती है। चार गोवंश पालने पर यह राशि ₹6,000 तक हो सकती है।
इसके अलावा ABP News और मनी कंट्रोल की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक बुलंदशहर के 15 गांवों में गोमूत्र खरीदने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ। इसमें ₹10 प्रति लीटर की दर से प्रतिदिन लगभग 500 लीटर गोमूत्र एकत्र किया जा रहा था। यह अभी प्रदेशव्यापी योजना नहीं है।

FactGiri का निष्कर्ष
FactGiri की पड़ताल में चारों मुद्दों पर सरकारी योजनाओं, निर्धारित बजट, उपलब्ध स्टॉक और राहत वितरण के प्रमाण मिले। इसलिए यह कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा कि खाद आपूर्ति, MSP खरीद, आपदा राहत या छुट्टा पशुओं के प्रबंधन के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं है।




