Factgiri Fact Check: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मीरापुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। 10 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी के X अकाउंट से साझा बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि मीरापुर में एक पुलिस अधिकारी ने रिवॉल्वर तानकर महिलाओं को मतदान करने से रोका था और महिलाओं के विरोध के बाद ही वे वोट डाल सकीं।
FactGiri की पड़ताल में सामने आया कि यह घटना 20 नवंबर 2024 की है। उस समय पुलिस और जिला प्रशासन ने मतदान रोकने के आरोप का खंडन करते हुए इसे दो पक्षों के विवाद और पुलिस पर पथराव से जुड़ी कार्रवाई बताया था।
मीरापुर में आखिर क्या हुआ था?
20 नवंबर 2024 को मुजफ्फरनगर की मीरापुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान ककरौली इलाके में विवाद हुआ था। इसी बीच एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें तत्कालीन थाना प्रभारी राजीव शर्मा हाथ में पिस्तौल लिए महिलाओं के सामने दिखाई दे रहे थे।
अखिलेश यादव ने वीडियो शेयर करते हुए आरोप लगाया था कि पुलिस अधिकारी रिवॉल्वर दिखाकर मतदाताओं को वोट डालने से रोक रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से SHO को तत्काल निलंबित करने की मांग भी की थी।
पुलिस ने क्यों निकाली थी पिस्तौल?
India Today, NDTV और मनी कंट्रोल की नवंबर 2024 की रिपोर्टों के अनुसार, मुजफ्फरनगर पुलिस ने अखिलेश यादव के आरोपों को खारिज किया था। उत्तर प्रदेश पुलिस और मुजफ्फरनगर जिला प्रशासन ने इस दावे का खंडन किया था। पुलिस के अनुसार, ककरौली में दो पक्षों (सपा और एआईएमआईएम के समर्थकों) के बीच फर्जी वोटिंग को लेकर विवाद हुआ था, जो बाद में हिंसक झड़प और पुलिस पर पथराव में बदल गया।
तत्कालीन जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने भी स्पष्ट किया था कि पुलिस टीम पथराव की घटना के बाद कानून-व्यवस्था संभाल रही थी। उन्होंने मतदाताओं को धमकाकर मतदान से रोकने के आरोप से इनकार किया था।

SSP ने वायरल वीडियो पर क्या कहा?
The Wire की 21 नवंबर 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन SSP अभिषेक सिंह ने कहा था कि वायरल वीडियो अधूरा है। उनके मुताबिक, पुलिस उपद्रवियों को नियंत्रित करने की कार्रवाई कर रही थी और वीडियो में पूरी घटना का संदर्भ नहीं दिखाया गया।
FactGiri की पड़ताल का निष्कर्ष
वीडियो वास्तविक है और पुलिस अधिकारी के हाथ में पिस्तौल दिखाई देती है। साथ ही, ककरौली में विवाद और पुलिस पर पथराव की घटना भी समकालीन समाचार रिपोर्टों में दर्ज है। पुलिस और जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि पिस्तौल के साथ की गई कार्रवाई का उद्देश्य कानून-व्यवस्था संभालना था, न कि मतदाताओं को मतदान से रोकना।
FactGiri Verdict: यह दावा भ्रामक है। पुलिस अधिकारी द्वारा रिवॉल्वर/पिस्तौल तानने की घटना सच है, लेकिन वह वोट रोकने के लिए नहीं, बल्कि हिंसक भीड़ और पथराव को नियंत्रित करने के लिए किया गया था।




