Factgiri Fact Check: आगरा की नाबालिग ने वीडियो जारी कर पुलिस पर परिवार को परेशान करने, धमकाने, जबरन समझौता कराने और वीडियो हटाने का दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने नाबालिग के आरोपों को आधार बनाकर यूपी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। FactGiri ने इस मामले की पड़ताल की तो पता चला कि वायरल वीडियो में एक तरफा दावा और आरोप लगाए जा रहे हैं।
वायरल वीडियो में क्या आरोप हैं?
वीडियो में नाबालिग का आरोप है कि पुलिस उसके परिवार पर दबाव बना रही है और वीडियो डिलीट नहीं करने पर माता-पिता को जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। यूपी कांग्रेस ने इसी वीडियो को आधार बनाकर पुलिस के ‘हाईटेक’ और ‘मित्र पुलिस’ के दावों पर सवाल उठाया।
पुलिस ने क्या बताया
वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस कमिश्नरेट आगरा ने अपने आधिकारिक X हैंडल से पोस्ट पर जवाब देते हुए पुलिस पर लगाए गए आरोपों को “पूर्णतः असत्य एवं निराधार” बताया।
आगरा पुलिस के मुताबिक मामला एक ही परिवार के दो पक्षों के बीच विवाद से जुड़ा है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच पहले रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद और मारपीट हुई थी। दोनों तरफ से थाना शाहगंज में लिखित शिकायतें दी गई थीं, लेकिन बाद में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से समझौता कर लिया था।

4 अक्टूबर 2026 को महिला की ओर से थाना शाहगंज में दोबारा तहरीर दी गई। इसमें दूसरे पक्ष पर मारपीट, झगड़ा और छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए। पुलिस का कहना है कि इस शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया गया। तहरीर के आधार पर शाहगंज पुलिस ने सुसंगत धाराओं में अभियोग दर्ज कर लिया।

वायरल वीडियो में नाबालिग ने पुलिस पर परिवार को परेशान करने, जेल भेजने की धमकी देने और वीडियो हटाने का दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए हैं। पुलिस कमिश्नरेट आगरा ने इन आरोपों को “पूर्णतः असत्य एवं निराधार” बताया है।
FactGiri का निष्कर्ष
वायरल वीडियो मामले का एकतरफा पक्ष दिखाता है। नाबालिग ने पुलिस पर धमकी और वीडियो डिलीट कराने का दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं, लेकिन पुलिस कमिश्नरेट आगरा ने अपने आधिकारिक X हैंडल से इन्हें “पूर्णतः असत्य एवं निराधार” बताया है।
FACTGIRI VERDICT: दावा एकतरफा/भ्रामक




