Factgiri Fact Check: उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में SIR-2026 के दौरान 16.18 लाख कथित ‘रहस्यमयी वोटर’ जोड़ने का दावा सोशल मीडिया पर चर्चा में है। The Reporters’ Collective ने 6 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट में आरोप लगाया कि इन मतदाताओं के Form-6 का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया और निर्वाचन आयोग ने इनकी पहचान छिपाई।
FactGiri की पड़ताल में सामने आया कि 16.18 लाख Form-6 का आंकड़ा वास्तविक है, लेकिन इन्हें अचानक या गुप्त तरीके से जोड़े गए ‘रहस्यमयी वोटर’ बताने के दावे को उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर खारिज किया है।
आखिर 16.18 लाख का आंकड़ा आया कहां से?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक ये 16.18 लाख Form-6 आवेदन 27 अक्टूबर 2025 से 6 जनवरी 2026 के बीच, यानी SIR के enumeration phase में BLO द्वारा घर-घर भ्रमण के दौरान एकत्र किए गए थे। ETV भारत, एबीपी न्यूज ने भी इसे पब्लिश्ड किया है।

ये आवेदन ऐसे पात्र नागरिकों से लिए गए, जिनके नाम 27 अक्टूबर 2025 को मौजूद मतदाता सूची में नहीं थे और इसी कारण उनके pre-printed enumeration forms तैयार नहीं हुए थे।
यानी 16.18 लाख संख्या कोई बाद में अचानक सामने आए मतदाताओं की संख्या नहीं, बल्कि draft roll प्रकाशित होने से पहले प्राप्त Form-6 applications का रिकॉर्ड है।
वेबसाइट पर इनका Form-9 क्यों नहीं दिखा?
The Reporters’ Collective का प्रमुख सवाल यही है। उसकी पड़ताल में CEO वेबसाइट पर 71.38 लाख Form-6 applications का विवरण मिला, जबकि इन 16.18 लाख pre-draft applications का वैसा विवरण नहीं मिला।
इस पर CEO ने कहा कि नियमों के तहत 6 जनवरी 2026 को draft voter list प्रकाशित होने के बाद claims and objections period में मिले Form-6 की सूची Form-9 के रूप में वेबसाइट पर प्रदर्शित की गई थी।
16.18 लाख आवेदन इससे पहले enumeration phase में मिल चुके थे। इसलिए उन्हें बाद में प्राप्त claims वाले Form-9 की तरह प्रदर्शित नहीं किया गया। CEO ने इसे नियमों का उल्लंघन मानने से इनकार किया है।
CEO कार्यालय का कहना है कि किसी निश्चित प्रतिशत में Form-6 स्वीकार करने का कोई नियम या formula नहीं है। प्रत्येक आवेदन निर्धारित प्रक्रिया और पात्रता की जांच के बाद स्वीकार या अस्वीकार किया जाता है।
FACTGIRI VERDICT: 16.18 लाख Form-6 का आंकड़ा सही; ‘रहस्यमयी/छिपाकर जोड़े गए वोटर’ वाला निष्कर्ष विवादित और भ्रामक।




