सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि सरकार बनने पर ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ के तहत महिलाओं को हर साल ₹40,000 दिए जाएंगे।
क्या ये वादा व्यावहारिक है?
खर्च का गणित (11 करोड़+ महिलाओं पर):
राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग के प्रोजेक्शन के अनुसार 2026 में यूपी की महिला आबादी लगभग 11.68 करोड़ है (अंतिम पूर्ण जनगणना 2011 में यह आंकड़ा 9.53 करोड़ था)।
अगर इतनी महिलाओं को ₹40,000 दिए जाएं तो सालाना खर्च होगा:
11.68 करोड़ × 40,000 = लगभग 4.67 लाख करोड़ रुपये
यूपी का वर्तमान बजट (2026-27):
कुल बजट 9.12 लाख करोड़ रुपये का है। राज्य का अपना कर राजस्व लगभग 3.34 लाख करोड़ है। राजकोषीय घाटे की सीमा 1.18 लाख करोड़ (GSDP का 3%) है।
ये एक योजना अकेले ही कुल बजट का आधा हिस्सा खा जाएगी।
अखिलेश सरकार के समय बजट:
2016-17 में अखिलेश यादव सरकार का बजट सिर्फ 3.46 लाख करोड़ रुपये का था। आज का बजट लगभग ढाई गुना बड़ा है, फिर भी इतनी बड़ी नकद योजना के लिए पर्याप्त नहीं।
पैसा कहाँ से आएगा?
- अन्य जरूरी विभागों (शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, सड़क, सिंचाई) का बजट काटकर
- बड़े पैमाने पर कर्ज लेकर (घाटे की सीमा टूट जाएगी)
- नए टैक्स बढ़ाकर या मौजूदा टैक्स रेट बढ़ाकर
- केंद्र से अतिरिक्त मदद मांगकर
विभागों का बजट काटने का नुकसान:
शिक्षा और स्वास्थ्य का बजट कम होने से स्कूल-अस्पताल प्रभावित होंगे।
पूंजीगत खर्च (सड़क, पुल, बिजली) कटने से विकास रुक सकता है।
कानून-व्यवस्था और किसानों की योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
लंबे समय तक घाटा बढ़ने से राज्य का कर्ज बोझ भारी हो जाएगा।
वर्डिक्ट
11.68 करोड़ महिलाओं पर लागू करने पर खर्च मौजूदा बजट के आधे से ज्यादा हो जाएगा। राज्य के अपने कर राजस्व से भी कहीं ज्यादा रकम लगेगी। बिना भारी कटौती या घाटे में भारी बढ़ोतरी के ये वादा पूरा करना लगभग असंभव है।
यह घोषणा चुनावी प्रलोभन ज्यादा लगती है, ठोस वित्तीय रोडमैप अभी तक सामने नहीं आया है।
बिहार में भी राजद ने महिलाओं को सालाना ₹30,000 देने का वादा किया था। वहां भी विशेषज्ञों ने बजट की सीमित क्षमता को देखते हुए इसे अव्यावहारिक बताया था।
स्रोत : https://budget.up.nic.in/




