Fact Check: सोशल मीडिया पर चेहरा ढकी युवतियों को पुलिस द्वारा ले जाते हुए एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को वाराणसी का बताकर दावा किया जा रहा है कि घर से दूर रहकर पढ़ाई करने वाली लड़कियां सेक्स रैकेट में पकड़ी गई हैं। हालांकि, Factgiri की पड़ताल में यह दावा भ्रामक निकला। वायरल वीडियो वाराणसी का नहीं, बल्कि बिहार के अरवल जिले का है।
क्या है वायरल दावा?
फेसबुक पेज ‘The Sanskriti Time’s News’ ने 10 अगस्त 2026 को और SnTV Bihar ने वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि वाराणसी में छापेमारी के दौरान सेक्स रैकेट का खुलासा हुआ और पढ़ाई के नाम पर किराए के मकान में रह रही लड़कियां देह व्यापार में पकड़ी गईं। पोस्ट को कई यूजर्स ने इसी दावे के साथ शेयर किया।

Factgiri की पड़ताल में क्या मिला?
वायरल वीडियो की जांच के लिए इसके प्रमुख फ्रेम निकालकर रिवर्स इमेज सर्च किया गया। पड़ताल में यही वीडियो जुलाई 2026 में प्रकाशित बिहार से जुड़ी खबरों में मिला।
जी न्यूज की 5 जुलाई की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के अरवल जिले के सदर थाना क्षेत्र स्थित जनकपुर धाम इलाके में पुलिस ने कार्रवाई की थी। रिपोर्ट में 14 लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई थी। भास्कर की रिपोर्ट में भी इसी इलाके में पुलिस कार्रवाई और लड़कियों के रेस्क्यू का जिक्र है। यानी वायरल वीडियो का संबंध वाराणसी से नहीं है।

वाराणसी में हुई थी पुलिस कार्रवाई?
पड़ताल में यह जरूर सामने आया कि जुलाई में वाराणसी के मलदहिया स्थित एक होटल में पुलिस ने सेक्स रैकेट के आरोप में कार्रवाई की थी, लेकिन इस कार्रवाई से वायरल वीडियो का कोई संबंध नहीं मिला।
10 अगस्त को वाराणसी पुलिस ने भी वायरल दावे का खंडन करते हुए स्पष्ट किया था कि वीडियो को वाराणसी में 32 लड़कियों की गिरफ्तारी का बताकर शेयर किया जा रहा दावा भ्रामक और तथ्यहीन है। पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी ने भी बताया कि वायरल वीडियो वाराणसी का नहीं है।
निष्कर्ष में सामने क्या आया
Factgiri की जांच में वायरल दावा भ्रामक पाया गया। बिहार के अरवल जिले में हुई पुलिस कार्रवाई के पुराने वीडियो को अब वाराणसी का बताकर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। वाराणसी में अलग कार्रवाई हुई थी, लेकिन वायरल वीडियो उससे संबंधित नहीं है।
दावा: वाराणसी में सेक्स रैकेट में लड़कियां पकड़ी गईं और यही वीडियो उसी कार्रवाई का है।
FACT: वीडियो बिहार के अरवल जिले की पुरानी पुलिस कार्रवाई का है। इसे वाराणसी का बताकर गलत संदर्भ में वायरल किया जा रहा है।
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