Factgiri Fact Check: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि नदियों की सफाई के नाम पर बजट तो आया, लेकिन जमीन पर काम नहीं हुआ। FactGiri ने इस दावे की पड़ताल के लिए नमामि गंगे, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के उपलब्ध आंकड़ों को खंगाला। FactGiri की पड़ताल में सामने आया कि 2017 के बाद यूपी में नदी सफाई के नाम पर सिर्फ कागजी दावे नहीं, बल्कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), नाला टैपिंग और छोटी नदियों के पुनरुद्धार पर काम हुआ है।
STP से नाला टैपिंग तक, कई परियोजनाओं पर हुआ काम
2017 के बाद यूपी में नदी सफाई के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), नालों की टैपिंग और सीवेज को नदी में जाने से रोकने जैसे काम किए गए। नमामि गंगे के रिकॉर्ड में यूपी के कई STP चालू हैं, जबकि कई परियोजनाओं पर अभी काम जारी है। प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या समेत कई शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता बढ़ाई गई है।
सिर्फ गंगा नहीं, छोटी नदियों पर भी काम
यूपी सरकार ने छोटी नदियों के पुनरुद्धार के लिए Small River Rejuvenation Action Plan शुरू किया है। इसमें नदियों से गाद हटाना, जलधारा को दोबारा विकसित करना, तालाबों को बहाल करना, पौधरोपण और सीवेज को नदी में जाने से रोकने जैसे काम शामिल हैं। सरकारी पोर्टल पर इन कार्यों की प्रगति का रिकॉर्ड भी उपलब्ध है।

गोमती के उद्गम क्षेत्र में भी पुनरुद्धार
पीलीभीत में गोमती के पुनरुद्धार का काम छोटी नदी पुनर्जीवन अभियान के तहत किया गया। 47 किलोमीटर हिस्से को 16 ग्राम पंचायतों में पुनर्जीवित किया गया, कई जगह नदी की चौड़ाई और गहराई बढ़ाई गई और 23 तालाबों को बहाल किया गया। इससे नदी में दोबारा निरंतर जल प्रवाह आने की बात सरकारी अधिकारियों ने कही। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस अभियान से 1.53 लाख से अधिक मानव-दिवस का रोजगार भी पैदा हुआ और 500 से अधिक किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई।

वाराणसी में भी STP क्षमता बढ़ी
वाराणसी में भी सीवेज ट्रीटमेंट का इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। यूपी के मौजूदा STP रिकॉर्ड में रामना का 50 MLD और भगवानपुर का 55 MLD STP मानकों के अनुरूप दर्ज है। सितंबर 2026 के अपडेट में भगवानपुर STP ऑपरेशनल दर्ज किया गया।

कानपुर की नून नदी: 48 KM का पुनरुद्धार
कानपुर नगर की नून नदी के 48 किलोमीटर हिस्से का पुनरुद्धार किया गया। सरकारी रिकॉर्ड में 23.70 किलोमीटर हिस्से पर काम और गाद/जलभराव से प्रभावित नदी तल को बहाल करने का उल्लेख है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इस अभियान में मनरेगा के तहत 58 ग्राम पंचायतों के करीब 6,000 श्रमिकों ने 23 किलोमीटर हिस्से पर काम किया और 23,000 से ज्यादा मानव-दिवस का रोजगार पैदा हुआ। नदी किनारे करीब 40 हजार पौधे लगाए गए।

इशन नदी का भी पुनरुद्धार
एटा, हाथरस, मैनपुरी, कन्नौज और कानपुर नगर से गुजरने वाली इशन नदी को भी पुनर्जीवित करने का काम चल रहा है। इसमें तालाबों की खुदाई, गाद हटाने और पौधरोपण जैसे काम किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक इस परियोजना से 44 ग्राम पंचायतों को फायदा हुआ।
FactGiri का निष्कर्ष
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के आधार पर ‘बजट आया लेकिन नदियों की सफाई के लिए कोई काम नहीं हुआ’ कहना सही नहीं है। STP, नाला टैपिंग और छोटी नदियों के पुनरुद्धार समेत कई परियोजनाओं पर काम हुआ है। इसलिए अखिलेश यादव का दावा भ्रामक है।




