Factgiri fact Check: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि यदि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में सपा की सरकार बनी, तो कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा बहाल करेंगे। सवाल यह है कि जब अखिलेश यादव 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब OPS बहाल क्यों नहीं की गई। इस पूरे मामले की पड़ताल में सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि यूपी में नई पेंशन व्यवस्था यानी NPS लागू कब हुई थी, और योगी सरकार ने NPS कर्मचारियोंं के लिए क्या किया।
यूपी में NPS कब लागू हुई?
उत्तर प्रदेश में NPS लागू करने की अधिसूचना 28 मार्च 2005 को जारी हुई थी और इसे 1 अप्रैल 2005 से नए कर्मचारियों पर लागू किया गया। उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी।
2024 में योगी सरकार ने क्या किया?
28 जून 2024 को योगी सरकार ने ऐसे कर्मचारियों को OPS चुनने का विकल्प दिया, जिनकी भर्ती वाली रिक्तियों का विज्ञापन 28 मार्च 2005 से पहले जारी हो चुका था, लेकिन उनकी नियुक्ति बाद में हुई थी।

इसके बाद 11 जुलाई 2024 को विकल्प की प्रक्रिया और प्रारूप से जुड़े निर्देश जारी हुए। 22 अगस्त 2024 के स्पष्टीकरण में पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया। करीब 50 हजार कर्मचारियों को लाभ मिलने की संभावना उस समय की रिपोर्टों में बताई गई थी।
सिर्फ आदेश नहीं, समय भी बढ़ाया
हां, 2025 में सरकार ने OPS विकल्प से जुड़ी समय-सीमा बढ़ाई। इसलिए इसे 11 जुलाई या 22 अगस्त 2024 के आदेशों से “कटऑफ बढ़ाना” कहना सही नहीं है। ये आदेश मुख्य रूप से प्रक्रिया और पात्रता से जुड़े थे। समय-सीमा में बाद में जुलाई 2025 में बदलाव किया गया।

NPS में सरकार का योगदान कितना बढ़ा?
योगी सरकार ने NPS में राज्य सरकार का योगदान 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत किया था। यानी contribution rate में पुराने स्तर की तुलना में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
FactGiri निष्कर्ष
यूपी में NPS की शुरुआत 2005 में मुलायम सरकार के दौरान हुई थी। अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल में इसे OPS में बदलने का फैसला नहीं हुआ।
वहीं योगी सरकार ने 2024 में 28 मार्च 2005 से पहले विज्ञापित पदों पर बाद में नियुक्त हुए पात्र कर्मचारियों के लिए OPS चुनने का रास्ता खोला।
योगी सरकार ने OPS के लिए कुछ नहीं किया” कहना उपलब्ध रिकॉर्ड से सही नहीं बैठता। रिकॉर्ड यह दिखाता है कि सरकार ने एक विशेष पात्र वर्ग को OPS का विकल्प दिया, प्रक्रिया स्पष्ट की और समय-सीमा भी बढ़ाई।




