Fact Check: सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी मीडिया सेल का एक वीडियो वायरल है, जिसमें लखनऊ की गोमती नदी के दो अलग-अलग दृश्य दिखाकर अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज की तुलना की गई है। एक तरफ रात में रोशनी और फाउंटेन वाला खूबसूरत रिवरफ्रंट दिखाया गया है, जबकि दूसरी तरफ नदी का साधारण और गंदा नजर आने वाला हिस्सा दिखाकर योगी सरकार पर सवाल उठाए गए हैं। Factgiri की पड़ताल में यह तुलना भ्रामक पाई गई।
अखिलेश सरकार में बना था रिवरफ्रंट
पड़ताल में यह सामने आया कि लखनऊ का गोमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ था। मार्च 2015 में परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत ₹656.58 करोड़ थी, जिसे बाद में बढ़ाकर करीब ₹1,513.52 करोड़ किया गया।
लेकिन वायरल वीडियो पूरी गोमती की तस्वीर नहीं दिखाता
वायरल वीडियो में दिखाया गया दूसरा दृश्य भी लखनऊ की गोमती नदी से जुड़ा है, लेकिन उसे पूरे गोमती रिवरफ्रंट की मौजूदा स्थिति बताना सही नहीं है। यह सेलेक्टिव है: रिवरफ्रंट का विकसित हिस्सा आज भी मौजूद है और इस्तेमाल होता है। योगी सरकार में भी इसे मेंटेन किया जा रहा है, और आगे विकास (पेडेस्ट्रियन ब्रिज, क्रूज, नेचर ट्रेल, और सफाई अभियान) चल रहे हैं। CM योगी ने हाल ही में गोमती को साफ करने के प्रयासों का जिक्र किया है।

ड्रोन सर्वे में गोमती में गिरने वाले 45 नाले चिन्हित किए गए।
इनमें से कई नालों की टैपिंग हो चुकी है या चल रही है।
नए STP प्रस्तावित/निर्माणाधीन: बसंतकुंज (160 MLD), जियामऊ (150 MLD), वजीरगंज (65 MLD), नीलमथा (65 MLD) आदि।
मौजूदा STP क्षमता बढ़ाने और सीवेज डायवर्जन का काम चल रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा कि 2026 के अंत तक गोमती को साफ करने का लक्ष्य है।
नमामि गंगे के तहत काम हो रहा है।
निष्कर्ष
समाजवादी पार्टी मीडिया सेल का यह पोस्ट Misleading है। यह सेलेक्टिव फुटेज का इस्तेमाल करके एक तरफा तस्वीर पेश कर रहा है। वर्तमान में बड़े पैमाने पर काम चल रहा है।




