Factgiri Fact Check: सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि ललितपुर में “भाजपा नेता के आवास पर नकली खाद फैक्ट्री” चल रही थी। पोस्ट में मकान मालिक का नाम कैलाश नारायण पुरोहित बताया गया है। FactGiri ने वायरल पोस्ट में दिए नाम और घटना से जुड़े कीवर्ड्स को सर्च कर पुलिस कार्रवाई तथा स्थानीय मीडिया रिपोर्टों की पड़ताल की। जांच में खाद की कथित अवैध री-पैकिंग का मामला तो सही मिला, लेकिन मकान मालिक को भाजपा नेता बताने की पुष्टि नहीं हुई।
कार्रवाई में किसका नाम आया?
दैनिक जागरण की 1 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक कृषि विभाग ने पनारी गांव स्थित एक मकान पर छापा मारा था। यहां से 217 बोरी खाद, खाली बोरियां, इलेक्ट्रॉनिक कांटा और सिलाई मशीन बरामद हुई। रिपोर्ट में मकान कैलाश पुरोहित का बताया गया है।
इसके बाद अमर उजाला की 2 अक्टूबर की रिपोर्ट में FIR की जानकारी सामने आई। जिला कृषि अधिकारी की तहरीर पर पुष्पेंद्र मिश्रा, मकान मालिक कैलाश नारायण पुरोहित और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

फिर भाजपा नेता वाला नाम कहां से आया?
FactGiri ने “कैलाश नारायण” के राजनीतिक रिकॉर्ड को खंगाला तो ललितपुर में भाजपा से जुड़े एक दूसरे व्यक्ति कैलाश नारायण निरंजन का रिकॉर्ड मिला।
अमर उजाला की जून 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी कैलाश नारायण निरंजन निर्विरोध ललितपुर जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए थे। बाद की रिपोर्टों में भी जिला पंचायत अध्यक्ष का पूरा नाम कैलाश नारायण निरंजन ही दर्ज है। इसके अलावा दैनिक भास्कर की भी 3 महीने पुरानी रिपोर्ट मिली, जिसमें उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष से प्रशासक बनाने की न्यूज पब्लिश है।

यानी खाद मामले में नामजद मकान मालिक कैलाश नारायण पुरोहित हैं, जबकि भाजपा से निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष कैलाश नारायण निरंजन हैं। दोनों के नाम में “कैलाश नारायण” समान है, यहीं से इस वायरल वीडियो में नाम को लेकर कन्फ्यूजन और भ्रामकता की पुष्टी हुई।
FactGiri का निष्कर्ष
वायरल पोस्ट में खाद मामले को भाजपा नेता के आवास से जोड़ने की पुष्टि उपलब्ध पुलिस कार्रवाई या विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों से नहीं होती। FIR में मकान मालिक कैलाश नारायण पुरोहित का नाम है, जबकि भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष रहे व्यक्ति कैलाश नारायण निरंजन हैं।
FactGiri Verdict: दावा भ्रामक, खाद मामले में नामजद मकान मालिक को भाजपा नेता बताने का उपलब्ध रिकॉर्ड में प्रमाण नहीं मिला।




