Fact Check : सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि कलेक्ट्रेट परिसर में सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद एक जज अधिकारियों पर भड़क गए। FactGiri की जांच में यह दावा भ्रामक निकला। वायरल वीडियो का सहारनपुर मस्जिद विवाद से कोई संबंध नहीं है। यह करीब चार साल पुराना वीडियो है और इसमें पटना हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप कुमार दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो की जांच के दौरान सबसे पहले इसके प्रमुख हिस्सों के स्क्रीनशॉट लेकर Google Lens/रिवर्स सर्च और संबंधित की-वर्ड सर्च किए गए। वीडियो में जज की टिप्पणियों से जुड़े शब्दों- “बुलडोजर”, “तमाशा बना दिया है”, “सिविल कोर्ट बंद कर दीजिए”-को अलग-अलग सर्च किया गया।
सर्च करने पर यही वीडियो और उससे जुड़ी खबरें दिसंबर 2022 की कई रिपोर्टों में मिलीं। Aaj Tak और ABP News की पुरानी रिपोर्टों में स्पष्ट तौर पर बताया गया है कि वीडियो पटना हाईकोर्ट का है और इसमें जस्टिस संदीप कुमार बिहार पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताते नजर आए थे।
क्या है वायरल वीडियो की असली कहानी?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला बिहार के पटना के अगमकुआं थाना क्षेत्र का है। नवंबर 2022 में सहयोग देवी नाम की महिला के घर को पुलिस और प्रशासन ने बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया था। महिला ने आरोप लगाया था कि जमीन विवाद में भूमि माफिया के दबाव में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया और घर गिरा दिया गया।
24 नवंबर 2022 को मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप कुमार ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने FIR की कार्यवाही पर रोक लगाई और पुलिस को महिला तथा उनके परिवार की गिरफ्तारी से रोका। जज ने जिम्मेदार अधिकारियों से मुआवजे की रकम उनकी जेब से दिलाने की बात भी कही थी।
सहारनपुर मामले से कैसे जुड़ा वीडियो
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर 5 सितंबर 2026 को प्रशासन ने कार्रवाई की थी। इस घटना के बाद पुराने पटना हाईकोर्ट के वीडियो को नए ओवरले और दावों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया गया।

निष्कर्ष
वायरल वीडियो सहारनपुर का नहीं है और इसमें जज योगी आदित्यनाथ या सहारनपुर मस्जिद मामले पर टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। यह नवंबर 2022 में पटना हाईकोर्ट की सुनवाई का पुराना वीडियो है, जिसे मौजूदा घटना से जोड़कर भ्रामक दावा किया जा रहा है।
FactGiri Verdict: MISLEADING




