Fact Check: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी मिडिया सेल ने दावा किया है कि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में 26,386 सरकारी प्राथमिक स्कूल बंद हो गए। उनका कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, पिछड़े और दलित बच्चों पर पड़ा है। इस दावे के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई यूपी में 26 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों पर ताला लगा दिया गया है? Factgiri ने UDISE+ के आंकड़ों, सरकारी बयानों और उपलब्ध रिपोर्टों की पड़ताल की, तो तो सच कुछ और ही निकला।
क्या है अखिलेश यादव का दावा?
अखिलेश यादव ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2016-17 में उत्तर प्रदेश में 1,13,938 सरकारी प्राथमिक स्कूल थे, जबकि 2025-26 में इनकी संख्या घटकर 87,552 रह गई। यानी दोनों आंकड़ों के बीच 26,386 स्कूलों का अंतर है। सपा इसी संख्या को आधार बनाकर दावा कर रही है कि बीजेपी सरकार ने 26,386 प्राथमिक स्कूल बंद कर दिए।
Factgiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
जब इस दावे की गहराई से जांच की गई, तो पाया गया कि स्कूलों को स्थाई रूप से बंद (Shut down) नहीं किया गया है, बल्कि शिक्षा विभाग की ‘स्कूल विलय नीति’ (School Merger Policy) के तहत उनका पास के बड़े स्कूलों में विलय किया गया है।शिक्षा का अधिकार (RTE Act) और प्रशासनिक दक्षता के नियमों के तहत, उत्तर प्रदेश सरकार उन परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का एकीकरण (Merger) कर रही है, जहां छात्रों का नामांकन (Enrolment) बहुत कम (50 से कम) है।
सरकार का यह भी कहना है कि जिन स्कूलों का विलय किया गया, उनके छात्रों और शिक्षकों को दूसरे स्कूल में समायोजित किया गया और स्कूल भवनों का इस्तेमाल दूसरी शैक्षणिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। 2026 में बेसिक शिक्षा मंत्री ने प्रदेश में 1,32,773 परिषदीय विद्यालय संचालित होने की बात भी कही।
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने विपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भ्रामक बताया है। सरकार के मुताबिक, जिन स्कूलों का विलय किया गया है, उनके छात्रों और शिक्षकों को पास के बड़े परिसर वाले स्कूल में शिफ्ट किया गया है। किसी भी शिक्षक की नौकरी नहीं गई है।
शिक्षा मंत्री ने साफ किया है कि 1 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर स्थित या 50 से अधिक छात्र संख्या वाले किसी भी स्कूल का विलय नहीं किया जा रहा है ताकि बच्चों को आने-जाने में परेशानी न हो।

जिन स्कूलों के भवन खाली हुए हैं, उन्हें पूरी तरह बंद करने के बजाय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत ‘बाल वाटिका’ (Pre-primary classrooms) के रूप में विकसित किया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान में 1,32,773 से अधिक परिषदीय विद्यालय पूरी सक्रियता के साथ संचालित हो रहे हैं और ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के जरिए इन्हें डिजिटल व आधुनिक बनाया जा रहा है।
Factgiri Verdict
MISLEADING | भ्रामक
उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राथमिक स्कूलों की संख्या में 26,386 की कमी का आंकड़ा मौजूद है, लेकिन इसे 26,386 स्कूलों के स्थायी रूप से बंद होने के बराबर बताना भ्रामक है।




