Fact Check: इटावा लायन सफारी पार्क में शेरनी राधिका की मौत के बाद समाजवादी पार्टी मीडिया सेल ने योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। 31 अगस्त 2026 को शेयर किए गए पोस्ट में दावा किया गया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में सफारी के कई शेर देखरेख, भोजन, दवा और डॉक्टरों की कमी के कारण मारे गए। Factgiri की पड़ताल में यह दावा भ्रामक पाया गया।
राधिका शेरनी के साथ क्या हुआ था?
Factgiri की पड़ताल में सामने आया कि राधिका की तबीयत 8 जुलाई 2026 को बिगड़नी शुरू हुई थी। दूसरी शेरनी नीरजा के साथ संघर्ष में उसकी पूंछ गंभीर रूप से घायल हो गई थी। संक्रमण की आशंका को देखते हुए विशेषज्ञों की सलाह पर 9 जुलाई को उसकी पूंछ की सर्जरी की गई।
इसके बाद राधिका का लगातार इलाज चला। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, सफारी के वन्यजीव विशेषज्ञ और पशु चिकित्सक उसकी निगरानी कर रहे थे। इलाज के दौरान उसकी हालत लगातार कमजोर होती गई और उसने सामान्य भोजन लेना बंद कर दिया था। वह पानी और चिकन सूप ही ले रही थी।
अमर उजाला की 27 अगस्त की रिपोर्ट में भी बताया गया था कि राधिका ने ठोस आहार लेना बंद कर दिया था और वन्यजीव चिकित्सकों तथा कीपरों की टीम उसकी लगातार निगरानी कर रही थी।

पोस्टमार्टम में क्या सामने आया?
राधिका ने 31 अगस्त की सुबह दम तोड़ दिया। इसके बाद पशु चिकित्सकों के पैनल ने उसका पोस्टमार्टम किया। शुरुआती रिपोर्ट में मल्टी ऑर्गन फेल्योर को मौत की वजह बताया गया है।
31 अगस्त तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राधिका की मौत के बाद इटावा लायन सफारी में 22 शेर, शेरनियां और शावक बचे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया और TV9 की रिपोर्टों में इनमें 16 शेरनियां और 6 शेर बताए गए हैं। सफारी का ब्रीडिंग सेंटर भी सक्रिय है और कुछ शावकों की हैंड-रेयरिंग की जा रही है।
Factgiri का निष्कर्ष
राधिका की मौत की खबर सही है, लेकिन उसे भोजन, दवा या डॉक्टरों की कमी से जोड़ने का दावा उपलब्ध जानकारी से साबित नहीं होता। रिकॉर्ड के मुताबिक चोट के बाद उसकी सर्जरी हुई और विशेषज्ञों की निगरानी में लंबे समय तक इलाज चला।
सपा मीडिया सेल का राधिका की मौत को भोजन, दवा और डॉक्टरों की कमी से जोड़ने वाला दावा MISLEADING यानी भ्रामक है।
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