Factgiri Fact Check: सोशल मीडिया पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण को लेकर एक पोस्ट वायरल हो रही है। इसमें दावा किया जा रहा है कि EWS लागू करके अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और खासकर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की आरक्षित सीटों की ‘महालूट’ की जा रही है। पोस्ट में EWS आरक्षण को ‘इस सदी का महाघोटाला’ भी बताया गया है। FactGiri ने इस आरोप की पड़ताल संविधान के प्रावधानों, केंद्र सरकार के आरक्षण नियमों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर की।
क्या EWS आरक्षण से OBC, SC-ST का कोटा घटा?
केंद्र सरकार ने 2019 में 103वें संविधान संशोधन के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था। इसके तहत संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में नए प्रावधान जोड़े गए।
केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के 31 जनवरी 2019 के आदेश में स्पष्ट है कि EWS का 10 प्रतिशत आरक्षण उन लोगों के लिए है, जो SC, ST और OBC आरक्षण के दायरे में नहीं आते।
इस प्रावधान से केंद्र की सामान्य आरक्षण व्यवस्था में SC का 15 प्रतिशत, ST का 7.5 प्रतिशत और OBC का 27 प्रतिशत आरक्षित कोटा घटाया नहीं गया। EWS की सीटें अलग निर्धारित की जाती हैं।

फिर EWS की कटऑफ OBC से कम क्यों हो सकती है?
हाल में उत्तर प्रदेश की होमगार्ड भर्ती के परिणाम के बाद अलग-अलग श्रेणियों की कटऑफ को लेकर भी सवाल उठे हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया और NDTV की रिपोर्टों के अनुसार, 3 अक्टूबर 2026 को जारी परिणाम में 41,424 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। भर्ती की कटऑफ जिला, श्रेणी और पुरुष-महिला वर्ग के अनुसार अलग निर्धारित की गई थी।
किसी जिले में EWS की कटऑफ OBC से कम होने का मतलब अपने आप यह नहीं है कि OBC की आरक्षित सीट EWS उम्मीदवार को दे दी गई। दोनों श्रेणियों में उपलब्ध पद और अभ्यर्थियों की प्रतिस्पर्धा अलग हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने EWS आरक्षण पर क्या फैसला दिया?
7 नवंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने Janhit Abhiyan बनाम भारत संघ मामले में 3:2 के बहुमत से 103वें संविधान संशोधन की वैधता बरकरार रखी। अदालत ने EWS के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के संवैधानिक प्रावधान को मान्यता दी।

EWS आरक्षण को हर मामले में ‘अतिरिक्त 10 प्रतिशत नई सीटें’ कहना सही नहीं होगा। इसका अर्थ अलग 10 प्रतिशत आरक्षण श्रेणी है; हर भर्ती में कुल पदों की संख्या 10 प्रतिशत बढ़ना जरूरी नहीं है। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट ने EWS आरक्षण की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी है, लेकिन इससे किसी विशेष भर्ती में अनियमितता न होने का प्रमाण नहीं मिल जाता।
FACTGIRI VERDICT: भ्रामक दावा। EWS आरक्षण के कारण OBC, SC और ST की निर्धारित आरक्षित सीटें सीधे छीन लिए जाने का आरोप मौजूदा संवैधानिक नियमों से समर्थित नहीं है।




