Factgiri Fact Check: आयुष मलिक धर्म परिवर्तन मामले को लेकर सोशल मीडिया पर एक और दावा तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कहा गया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान शामली पुलिस को फटकार लगाई। पोस्ट में कोर्ट की कार्रवाई को पुलिस के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर पेश किया गया। हालांकि, FactGiri की पड़ताल में यह दावा फेक निकला। शामली पुलिस ने खुद वायरल दावे को तथ्यहीन और भ्रामक बताते हुए छह सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
हाईकोर्ट में असल में क्या हुआ था?
इलाहाबाद हाईकोर्ट में आयुष मलिक को लेकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) दाखिल की गई थी। 9 सितंबर को कोर्ट ने आयुष को 16 सितंबर को पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बाद आयुष को अदालत में पेश किया गया।
अदालत में आयुष ने अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाने और अपनी पसंद से चांदनी कुरैशी के साथ विवाह करने की बात कही। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार रहने, आने-जाने और अपनी पसंद के धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता दी। उपलब्ध कोर्ट रिकॉर्ड में पुलिस को फटकार लगाने का कोई आदेश नहीं मिलता।
6 सोशल मीडिया हैंडल पर क्यों हुई FIR?
शामली पुलिस के मुताबिक, कोर्ट के इस आदेश को तोड़-मरोड़कर पेश करते हुए पुलिस को फटकार लगाए जाने का दावा किया गया। इसके बाद छह सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ कोतवाली शामली में मुकदमा दर्ज किया गया।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें एक्स पर करिश्मा अजीज, निखत अली, The Muslim, वसीम अकरम त्यागी और सैयद कैफ हसन तथा फेसबुक पर नदीम साई शामिल हैं। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है।

हिन्दुस्तान ने भी रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया कि हाईकोर्ट की ओर से शामली पुलिस को फटकार लगाए जाने का दावा गलत था। वहीं नवभारत टाइम्स ने भी छह सोशल मीडिया हैंडल्स पर FIR की जानकारी दी है।

FactGiri निष्कर्ष
सोशल मीडिया पर किया गया “इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक मामले में शामली पुलिस को फटकार लगाई” वाला दावा फेक है।




