Factgiri Fact Check: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सोशल मीडिया पर EVM को लेकर एक दावा तेजी से वायरल हुआ। 19 सितंबर 2026 को @khanna_somnath नाम के यूजर ने पोस्ट में दावा किया कि “EVM के साथ BJP के इशारे पर छेड़-छाड़ की जा रही हैं। पोस्ट में लगी तस्वीर पर लिखा था- UP चुनाव से पहले 5000 EVM के साथ कानपुर क्यों पहुंचे 12 इंजीनियर? दावा किया गया कि बाहर से EVM लाकर उनमें छेड़छाड़ की जा रही है।
FactGiri की पड़ताल में यह दावा भ्रामक निकला। जांच में सामने आया कि कानपुर में EVM की First Level Checking (FLC) चल रही थी, लेकिन किसी दूसरे स्थान से 5,000 नई EVM कानपुर नहीं लाई गई थीं।
क्या है वायरल दावे का सच?
दावे की पड़ताल के दौरान कानपुर नगर के जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी स्पष्टीकरण मिला। DEO ने 20 सितंबर को साफ किया कि 5,000 EVM के साथ 12 इंजीनियरों के कानपुर पहुंचने का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है।
प्रशासन के मुताबिक, कानपुर नगर में EVM की First Level Checking (FLC) 17 सितंबर 2026 से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में शुरू हुई थी। इस जांच के लिए किसी दूसरे स्थान से कोई EVM कानपुर नहीं लाई गई थी।
फिर 12 इंजीनियर कानपुर क्यों आए?
पड़ताल में यह हिस्सा सही पाया गया कि EVM की तकनीकी जांच के लिए इंजीनियर मौजूद थे। वायरल दावे में इस तथ्य को EVM बाहर से लाने और छेड़छाड़ से जोड़ दिया गया, जबकि प्रशासन के अनुसार यह निर्धारित FLC प्रक्रिया का हिस्सा था।
Times of India ने भी 18 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में कानपुर में EVM और VVPAT की तकनीकी जांच शुरू होने की जानकारी दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक यह चुनावी तैयारियों के तहत होने वाली नियमित प्रक्रिया है। वहीं UNI Varta ने 20 सितंबर को DEO के स्पष्टीकरण को प्रकाशित करते हुए 5,000 EVM पहुंचने के दावे को भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। टीवी 9 न्यूज वेबसाइट पर 21 सितंबर को पब्लिश्ड आर्टिकल में भी इस बात की पुष्टी हुई।

FactGiri निष्कर्ष
सोशल मीडिया पर किया गया “5000 EVM बाहर से कानपुर लाई गईं और उनमें छेड़छाड़ हो रही है” वाला दावा भ्रामक है।




