Bhardua Chandauli Fact Check: चंदौली के नौगढ़ क्षेत्र के भरदुआ-विशेश्वरपुर गांव में जमीन और फसल को लेकर हुए विवाद को लेकर भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने अने सोशल मीडिया अकाउंट X पर एक पोस्ट किया है। पोस्ट में दावा किया गया कि स्थानीय भाजपा नेता के दबाव में करीब 50 वर्षों से रह रहे गोंड/मांझी समुदाय के परिवारों की फसलें प्रशासन ने नष्ट कर दीं, महिलाओं के साथ मारपीट की गई।
हालांकि, Factgiri की पड़ताल में ये दावा एकतरफा साबित हुआ। प्रशासन और पुलिस के मुताबिक 19 अगस्त को टीम सरकारी/वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंची थी और कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों ने टीम पर हमला कर दिया।
Fact Check: कार्रवाई क्यों हुई थी?
इस दावे की पड़ताल के दौरान द टाइम्स ऑफ इंडिया, द प्रिंट और नवभारत टाइम्स की रिपोर्टों से मिलान करने पर सामने आया कि 19 अगस्त को वन, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम भरदुआ-विशेश्वरपुर गांव में कथित अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। अधिकारियों के मुताबिक विवादित जमीन वन विभाग की सरकारी जमीन थी और वहां धान व मिर्च की खेती की जा रही थी।

पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल के अनुसार, जमीन को लेकर पिछले दो-तीन महीने से विवाद चल रहा था। प्रशासन का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू की।
कार्रवाई के दौरान क्या हुआ?
पुलिस के मुताबिक कार्रवाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने विरोध किया। करीब 60 लोगों ने पुलिस और प्रशासनिक टीम पर लाठी-डंडों से हमला किया। इस दौरान एक होमगार्ड और वन विभाग के अधिकारी के सिर में चोट आई। स्थिति संभालने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया।
अमर उजाला की रिपोर्ट में भी संयुक्त टीम पर पथराव और लाठी-डंडों से हमला किए जाने तथा पुलिस द्वारा हल्का बल प्रयोग किए जाने की जानकारी दी गई है। इस मामले में 20 नामजद समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई।

30 हेक्टेयर जमीन का भी सामने आया मामला
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, वन विभाग ने करीब 30 हेक्टेयर सरकारी वन भूमि पर लंबे समय से कथित अतिक्रमण होने की बात कही है।
Fact Check: क्या निकला निष्कर्ष?
दावा: प्रशासन ने आदिवासी परिवारों की जमीन पर जबरन कार्रवाई कर उनकी फसल नष्ट की और पुलिस ने ग्रामीणों पर अत्याचार किया।
फैसला: MISLEADING/ एकतरफा दावा
Factgiri Verdict: वायरल दावा भ्रामक है, किसी स्थानीय नेता के दबाव की कोई बात सामने नहीं आई। वायरल पोस्ट में मामले को आधा-अधूरा और तोड़ मरोड़ कर सामने रखा गया है।




