Fact Check: समाजवादी पार्टी मीडिया सेल ने अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव बटेश्वर को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधते हुए विकास कार्यों पर सवाल उठाए हैं। पोस्ट में तंज कसते हुए कहा गया कि “अटल जी के बटेश्वर के लुटेरे ज्ञान दे रहे हैं।” दावा किया गया कि गांव की हालत खराब है। Factgiri की पड़ताल में सामने आया कि बटेश्वर में समस्याओं और पुराने उपेक्षा के दावों के बीच मौजूदा समय में कई बड़े विकास कार्य भी चल रहे हैं।
क्या है सपा का दावा?
सपा मीडिया सेल ने योगी आदित्यनाथ ऑफिस के एक पोस्ट को कोट करते हुए बटेश्वर का जिक्र किया और सरकार पर सवाल खड़े किए। पोस्ट का राजनीतिक संदर्भ JPNIC विवाद से जुड़ा है, लेकिन बटेश्वर को लेकर किए गए दावे की तस्वीर अलग है।
बटेश्वर में क्या काम हो रहा है?
उपलब्ध सरकारी और हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार बटेश्वर को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित कर रही है। SASCI योजना के तहत करीब ₹71.50 करोड़ की परियोजना पर काम चल रहा है। इसमें अब तक ₹56.11 करोड़ से अधिक जारी किए जा चुके हैं और परियोजना को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है।

परियोजना में बटेश्वर के प्रसिद्ध 101 शिव मंदिरों और यमुना किनारे के घाटों से जुड़े पर्यटन विकास के साथ आधुनिक पर्यटक सुविधाएं विकसित करने की योजना शामिल है।
पर्यटन विभाग ने पैतृक आवास को “अटल स्मृतिका” (Atal Smritika) के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। इसमें म्यूरल वॉल बनाई जाएगी, जिसमें अटल जी की यादें उकेरी जाएंगी। बजट लगभग ₹10 करोड़ (कुछ रिपोर्ट्स में ₹6.50 करोड़ भी बताया गया) स्वीकृत किया गया है।
रेलवे कनेक्टिविटी में भी बदलाव
बटेश्वर रेलवे स्टेशन को लेकर भी बड़ा कदम सामने आया है। रेल मंत्रालय के अनुसार आगरा डिवीजन ने इसे ‘D’ श्रेणी के हॉल्ट से ‘B’ श्रेणी के क्रॉसिंग स्टेशन में बदलने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव में दो लूप लाइन, नया स्टेशन भवन, हाई-लेवल प्लेटफॉर्म, सर्कुलेटिंग एरिया और अन्य यात्री सुविधाएं शामिल हैं।

Factgiri का निष्कर्ष
बटेश्वर में वर्तमान में करोड़ों रुपये की पर्यटन परियोजना और रेलवे से जुड़े विकास कार्य चल रहे हैं। इसलिए सपा मीडिया सेल का बटेश्वर को लेकर पेश किया गया दावा भ्रामक/MISLEADING तस्वीर पेश करता है।




