Factgiri Fact Check: समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रजापति की गिरफ्तारी को लेकर सोशल मीडिया पर एक बार फिर राजनीतिक आरोप लगाए जा रहे हैं। X पर @YadavManish1001 नाम के अकाउंट से दावा किया गया कि भाजपा ने प्रजापति समाज में मजबूत पकड़ रखने वाले गायत्री प्रजापति को साजिश के तहत बदनाम करके जेल भेजा। लेकिन FactGiri की पड़ताल में सामने आया कि गायत्री प्रजापति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मुकदमा दर्ज हुआ था और नवंबर 2021 में लखनऊ की विशेष अदालत ने उन्हें सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो मामले में दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
मनीष यादव के पोस्ट में क्या दावा किया गया?
वायरल पोस्ट में कहा गया कि गायत्री प्रजापति समाजवादी पार्टी के प्रभावशाली नेता थे, इसलिए उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत जेल भेजा गया। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि यदि वह भाजपा में शामिल हो जाते तो उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। इसके अलावा 2019 और 2024 के चुनावों में उनके परिवार से दबाव डालकर भाजपा के लिए प्रचार कराने की बात कही गई।
FactGiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
समाचार रिपोर्टों और न्यायिक रिकॉर्ड के मुताबिक, चित्रकूट की एक महिला ने गायत्री प्रजापति और उनके सहयोगियों पर सामूहिक दुष्कर्म तथा अपनी नाबालिग बेटी के साथ यौन अपराध के प्रयास का आरोप लगाया था।
पीड़िता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी 2017 को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। अगले दिन लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। गायत्री प्रजापति को 15 मार्च 2017 को गिरफ्तार किया गया था। यानी उस वक्त यूपी में अखिलेश यादव की सरकार थी न कि भजापा की।

अदालत ने क्या फैसला सुनाया?
10 नवंबर 2021 को लखनऊ की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने गायत्री प्रजापति, आशीष शुक्ला और अशोक तिवारी को दोषी ठहराया। 12 नवंबर को अदालत ने तीनों को उम्रकैद और प्रत्येक पर दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, चार अन्य आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण बरी कर दिया गया। इससे स्पष्ट है कि मामले में अदालत ने सुनवाई के बाद दोषसिद्धि का फैसला दिया था।

क्या परिवार ने भाजपा के लिए प्रचार किया था?
मई 2024 में गायत्री प्रजापति के बेटे अनुराग और बेटी अंकिता ने अमेठी में भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी के समर्थन में प्रचार किया था। लाइव हिंदुस्तान, अमर उजाला और एबीपी न्यूज ने इसकी रिपोर्ट प्रकाशित की थी। गायत्री प्रजापति की पत्नी महाराजी प्रजापति उस समय अमेठी से सपा विधायक थीं।
परिवार से धमकी देकर प्रचार कराने या 2019 में जबरन भाजपा का समर्थन करवाने का कोई पुष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं है। कुछ न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, गायत्रि प्रजापति के परिवार ने कहा था कि उस वक्त गायत्री प्रजापति की जेल और ED की कार्रवाइयों के दौरान समाजवादी पार्टी ने पर्याप्त साथ नहीं दिया।

FactGiri का निष्कर्ष
गायत्री प्रजापति की गिरफ्तारी को केवल भाजपा की राजनीतिक साजिश बताने का दावा उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड से प्रमाणित नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एफआईआर दर्ज हुई और विशेष अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
FactGiri Verdict: राजनीतिक साजिश और दबाव के आरोप अप्रमाणित/ भ्रामक




