Fact Check: उत्तर प्रदेश के कानपुर में बाढ़ प्रभावित बर्रा मायापुरम इलाके में एक्सपायरी कफ सिरप बांटे जाने की खबर ने बुधवार को सामने आई। वायरल खबरों में दावा किया गया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बाढ़ राहत शिविर में जुलाई 2026 में एक्सपायर हो चुकी सिरप बांटी और इसे पीने के बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। लेकिन बाद में कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी की जांच रिपोर्ट में इस दावे से अलग तस्वीर सामने आई। Factgiri की पड़ताल में उपलब्ध विभागीय स्पष्टीकरण और रिपोर्टों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक्सपायरी सिरप बांटे जाने का दावा साबित नहीं होता।
क्या था वायरल दावा?
समाजवादी पार्टी मीडिया सेल ने आरोप लगाया कि, 2 सितंबर को पांडु नदी की बाढ़ से प्रभावित बर्रा मायापुरम में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने करीब 20 परिवारों को दवाएं बांटी थीं, वो एक्सपायरी थी। इनमें Trimethoprim and Sulphamethoxazole IP सिरप भी होने का दावा किया गया। सिरप की बोतल पर जुलाई 2026 की एक्सपायरी डेट दिखाई गई। इसके बाद कुछ बच्चों के बीमार होने और उल्टी की शिकायत सामने आई।
Factgiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
कानपुर स्वास्थ्य विभाग की जांच के मुताबिक 2 सितंबर को बाढ़ राहत कैंप में उक्त सिरप का वितरण हुआ ही नहीं था। विभाग ने रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर की जांच के बाद इसका खंडन किया है।
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित सिरप वर्ष 2025 में ड्रग वेयरहाउस, कानपुर नगर को मिली थी और मार्च 2025 तक इसे जिले के CHC और PHC में वितरित किया जा चुका था। मौजूदा रिकॉर्ड में किसी स्वास्थ्य केंद्र पर इस बैच की दवा उपलब्ध नहीं मिली। बाढ़ राहत के लिए बनाए गए स्टॉक रजिस्टर में भी इसकी कोई एंट्री नहीं मिली।

फिर बच्चों के बीमार होने की बात?
बच्चों के बीमार होने की शिकायत और निजी डॉक्टर से इलाज कराने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, उपलब्ध विभागीय जांच से यह स्थापित नहीं होता कि बच्चों की तबीयत सरकारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा बांटी गई एक्सपायरी सिरप की वजह से खराब हुई।
निष्कर्ष
Verdict: MISLEADING | भ्रामक
कानपुर में बच्चों के बीमार होने और एक्सपायरी सिरप की तस्वीर से जुड़ी शिकायत सामने आई थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी सिरप बांटी थी—इस दावे की पुष्टि विभागीय रिकॉर्ड नहीं करते। जांच में संबंधित दवा की बाढ़ राहत कैंप के स्टॉक रजिस्टर में कोई एंट्री नहीं मिली। इसलिए वायरल खबर को सीधे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही बताना भ्रामक है।




