Fact Check: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने हालिया भाषण में दावा किया कि देश में 1 लाख सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता बताते हुए सरकार पर हमला बोला। लेकिन आधिकारिक आंकड़े, यूपी सरकार के बयान और नीति आयोग की रिपोर्ट इस दावे को गलत साबित करती है।
यूपी में क्या हुआ?
उत्तर प्रदेश सरकार ने बार-बार साफ किया है कि एक भी सरकारी स्कूल बंद नहीं किया गया है।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने विधानसभा और प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- कोई स्कूल बंद नहीं किया गया। 50 से कम नामांकन वाले स्कूलों को 1 किलोमीटर के दायरे में मौजूद स्कूलों के साथ पेयरिंग (मर्जर) किया गया है। UDISE कोड वही रहेगा। अगर छात्रों की संख्या बढ़ती है तो पुराने भवन में फिर से क्लास शुरू की जा सकती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विधानसभा में कहा- हम स्कूल बंद नहीं कर रहे, बल्कि पेयरिंग कर रहे हैं। इससे छात्र-शिक्षक अनुपात सुधरेगा और सुविधाएं बेहतर होंगी।
खाली भवनों में क्या हो रहा है?
यूपी सरकार का सबसे बड़ा जवाब यही है – मर्ज होने के बाद खाली पड़े स्कूल भवनों में बाल वाटिका (Kindergarten/Pre-Primary) शुरू की जा रही है।

अगस्त 2025 में ही 5,000 से ज्यादा बाल वाटिकाएं औपचारिक रूप से शुरू की गईं। यानी स्कूल बंद नहीं हुए, बल्कि उनका उपयोग प्री-प्राइमरी शिक्षा के लिए हो रहा है।
राष्ट्रीय तस्वीर क्या कहती है?
नीति आयोग और UDISE+ आंकड़ों के अनुसार 2014-15 से 2024-25 के बीच देशभर में सरकारी स्कूलों की संख्या में लगभग 94 हजार की कमी आई है। यह कमी मुख्य रूप से मर्जर और रेशनलिज़ेशन की वजह से हुई है, न कि स्कूलों को ताला लगाने से।
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 खुद छोटे स्कूलों को जोड़कर स्कूल कॉम्प्लेक्स बनाने की सिफारिश करती है, ताकि संसाधन बेहतर इस्तेमाल हों।
निष्कर्ष
संजय सिंह का 1 लाख स्कूल बंद वाला आंकड़ा अतिरंजित और भ्रामक/MISLEADING है। वास्तविकता यह है स्कूल बंद नहीं हुए, मर्ज/पेयर हुए। UP में खाली भवनों में सरकार बाल वाटिका चला रही है।




