UPI पेमेंट पर टैक्स और अमेरिकी कंपनियों को फायदा? वायरल दावे की Factgiri पड़ताल में सामने आया सच

Factgiri Fact Check: सोशल मीडिया पर UPI को लेकर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इसमें दावा किया जा रहा है कि डिजिटल पेमेंट की बड़ी कंपनियां अमेरिकी हैं और मोदी सरकार अब आम लोगों के UPI भुगतान पर टैक्स लगाने जा रही है। पोस्ट में इसे “पैसा हमारा, मुनाफा अमेरिका का” बताते हुए सवाल किया गया है कि इसका फायदा आखिर किसे मिलेगा।

Factgiri की पड़ताल में सामने आया कि वायरल पोस्ट में अलग-अलग वास्तविक तथ्यों को जोड़कर एक भ्रामक निष्कर्ष निकाला गया है। सरकार ने UPI पर आम लोगों के लिए कोई सामान्य टैक्स नहीं लगाया है। 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant यानी P2M transactions पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू होगा। सरकार ने साफ कहा है कि MDR टैक्स नहीं है और इसे ग्राहक से नहीं लिया जाना है।

क्या आम लोगों के UPI पेमेंट पर टैक्स लगेगा?

नहीं, वित्त मंत्रालय ने 15 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा कि Person-to-Person यानी P2P UPI transactions पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, चाहे रकम कितनी भी हो। ₹2,000 तक के merchant payments भी MDR से बाहर रहेंगे।

इसके अलावा The Economics Times में पब्लिश आर्टिकल के अनुसार, UPI QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले निर्धारित छोटे merchants के लिए भी zero-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के मुताबिक करीब 96% P2M transactions MDR से प्रभावित नहीं होंगे। यानी किसी दोस्त को ₹5,000 भेजने पर नया MDR नहीं लगेगा। इसी तरह किसी दुकान पर ₹1,500 का UPI भुगतान करने पर भी ग्राहक से MDR नहीं लिया जाएगा।

फिर 0.4% वाली बात क्या है?

नया framework 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। इसके तहत निर्धारित ₹2,000 से अधिक के P2M transactions पर 0.4% MDR लगेगा। ₹75,000 या उससे अधिक के transaction पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति transaction तक सीमित रहेगा।

मसलन, किसी eligible merchant को ₹10,000 का भुगतान होने पर MDR ₹40 बनता है। लेकिन यह ₹40 ग्राहक के UPI payment में अलग से जोड़ने का नियम नहीं है।

वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि merchant MDR को ग्राहक पर न डालें। UPI application providers को hidden या platform charges लगाने से भी रोका गया है।

कुछ जरूरी और कम-margin वाले sectors—जैसे रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और agricultural inputs—में ₹2,000 से ऊपर के transactions के लिए ₹5 का flat MDR रखा गया है। वहीं mutual funds, securities, stockbrokers और dealers से जुड़े capital-market payments पर 0.02% MDR, अधिकतम ₹300 होगा।

क्या MDR टैक्स है?

नहीं, वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR न तो टैक्स है और न ही सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला charge। यह payment ecosystem के participants- जैसे banks, payment service providers और UPI application providers के बीच वितरित होगा। सरकार के मुताबिक इसका मकसद UPI ecosystem की long-term sustainability और payment infrastructure को मजबूत करना है।

क्या अमेरिकी कंपनियां UPI से जुड़ी हैं?

PhonePe भारत में domiciled company है, लेकिन उसके corporate structure में अमेरिकी कंपनी Walmart की महत्वपूर्ण भूमिका है। PhonePe ने खुद 2022 में घोषणा की थी कि कंपनी को पूरी तरह India-domiciled बनाया गया और Walmart majority shareholder बना रहा। PhonePe के हालिया corporate filing में भी Walmart Inc. को उसका ultimate holding company बताया गया है।

अमेरिकी कंपनी Google भी भारत में Google Pay का संचालन करती है। लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना कि “UPI अमेरिकी सिस्टम है” या “MDR इसलिए लगाया गया ताकि अमेरिकी कंपनियों को फायदा हो”, अलग बात है।

USTR की रिपोर्ट में क्या कहा गया?

अमेरिका के United States Trade Representative (USTR) की 2026 National Trade Estimate Report में UPI को लेकर अमेरिकी payment companies की concerns दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक दो U.S.-owned electronic payment application suppliers मिलकर भारत के 80% से ज्यादा UPI transactions process कर रहे थे। रिपोर्ट में UPI के third-party app market-share cap का भी उल्लेख है।

यह तथ्य बताता है कि अमेरिकी ownership वाली payment companies की UPI ecosystem में बड़ी commercial presence है।

लेकिन USTR की रिपोर्ट यह नहीं कहती कि भारत सरकार ने 2026 का MDR अमेरिकी कंपनियों के मुनाफे के लिए लागू किया। दूसरी ओर, भारत सरकार अपने framework को UPI infrastructure की sustainability और ecosystem participants के लिए viable revenue model से जोड़ती है।

Factgiri Verdict

दावा: भ्रामक

वायरल पोस्ट का यह कहना कि आम लोगों के UPI payment पर नया टैक्स लगाया जा रहा है, गलत है। P2P payments मुफ्त रहेंगे और ₹2,000 तक के merchant transactions तथा निर्धारित छोटे merchants भी zero-MDR व्यवस्था में रहेंगे।

हां, 15 अक्टूबर से कुछ बड़े merchant payments पर 0.4% MDR लागू होगा और इसका revenue banks, payment service providers तथा UPI application providers के बीच जाएगा। इसलिए payment apps को ecosystem revenue में हिस्सा मिल सकता है।

यह भी तथ्य है कि PhonePe में Walmart की majority ownership है और USTR के मुताबिक दो U.S.-owned payment application suppliers UPI transactions का 80% से ज्यादा process कर रहे थे। लेकिन इन तथ्यों से यह साबित नहीं होता कि मोदी सरकार ने MDR अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए लगाया है।

इसलिए पैसा हमारा, मुनाफा अमेरिका का” और आम लोगों पर UPI टैक्स वाला निष्कर्ष उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों से साबित नहीं होता।

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