Factgiri Fact Check: सोशल मीडिया पर गोरखपुर के कुर्मी युवक रजत चौधरी का वीडियो वायरल है। इसमें वह आरोप लगाता दिख रहा है कि उसके खिलाफ फर्जी मुकदमे और गुंडा एक्ट की कार्रवाई सिर्फ इसलिए की जा रही है क्योंकि वह कुर्मी समाज से आता है। सपा मीडिया सेल के पोस्ट में इसे भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कथित “ठाकुरवादी” कार्यशैली से जोड़कर प्रचारित किया गया है। लेकिन उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों की पड़ताल में सामने आया कि युवक पर पहले से 7 मुकदमे दर्ज हैं।
रजत चौधरी के खिलाफ हाल में क्या मामला हुआ?
दैनिक भास्कर, जागरण और अमर उजाला की रिपोर्टों के मुताबिक, सितंबर 2026 में भाजपा से जुड़े पूर्व उपसभापति/पार्षद प्रतिनिधि बृजेश सिंह उर्फ छोटू ने रजत चौधरी के खिलाफ शिकायत की थी। आरोप था कि रजत ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया और कमेंट में उन्हें धमकी दी। मामले में शाहपुर थाने में FIR दर्ज हुई और रजत को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। वह 15 सितंबर को जेल से बाहर आया। यानी हिस्ट्रीशीट की कार्रवाई से पहले एक ताजा FIR का रिकॉर्ड मौजूद है।

हिस्ट्रीशीट क्यों खोली गई?
जेल से रिहाई के बाद पुलिस ने रजत चौधरी और सुरेंद्र निषाद को ‘दुराचारी’ घोषित कर ख-प्रकार की हिस्ट्रीशीट खोली। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, रजत के खिलाफ अलग-अलग थानों में कुल सात मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि हिस्ट्रीशीट आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर खोली गई है और आगे उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी।

पोस्ट में क्या छूट गया?
वायरल पोस्ट में युवक का जातिगत भेदभाव वाला आरोप प्रमुखता से दिखाया गया, लेकिन उसके खिलाफ दर्ज सात मुकदमों और हालिया धमकी मामले की पूरी पृष्ठभूमि सामने नहीं रखी गई।
Factgiri का निष्कर्ष – भ्रामक
FactGiri की पड़ताल में वायरल दावा भ्रामक निकला। रजत चौधरी का जाति के आधार पर फर्जी मुकदमे का आरोप उनका दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिकॉर्ड से नहीं होती।




