Factgiri Fact Check: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार का CCTV वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो साझा करते हुए दावा किया जा रहा है कि पुलिस आरोपी को पकड़कर थाने ले गई, लेकिन कुछ घंटे बाद धारा 151 के तहत कार्रवाई कर उसे छोड़ दिया। लेकिन FactGiri की पड़ताल में सामने आया कि पुलिस ने घटना के दिन ही मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था और न्यायालय में पेश किया था।
क्या है वायरल वीडियो का दावा?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रिया सिंह नाम के अकाउंट से अलीगढ़ का CCTV वीडियो साझा किए जाने की जानकारी सामने आई है। वायरल पोस्ट में आरोप है कि नाबालिग लड़की के साथ अश्लील हरकत करने वाले व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया, लेकिन कुछ घंटे बाद शांतिभंग की कार्रवाई करके छोड़ दिया।
FactGiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
FactGiri ने इस मामले में आजतक, अमर उजाला और हिंदुस्तान की रिपोर्टों की जांच की। इनके मुताबिक, घटना 10 अक्टूबर 2026 को जवां थाना क्षेत्र के बरौली बाजार में हुई थी। आरोप है कि गणेश शर्मा उर्फ गुड्डू नाम के व्यक्ति ने एक नाबालिग लड़की के साथ सरेआम अभद्र व्यवहार किया।
आरोपी की गिरफ्तारी पर पुलिस ने क्या बताया?
अलीगढ़ के एसपी सिटी आदित्य बंसल ने स्पष्ट किया कि घटना वाले दिन ही संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी गणेश शर्मा उर्फ गुड्डू को गिरफ्तार कर न्यायालय के सामने पेश किया गया। इसके बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की विवेचना की गई। हिंदुस्तान की 16 अक्टूबर की रिपोर्ट में बताया गया है कि आरोपी को बाद में न्यायालय से जमानत मिल गई थी। इसलिए पुलिस द्वारा बिना किसी कार्रवाई के आरोपी को छोड़ देने और न्यायालय से जमानत मिलने में अंतर है।
लापरवाही पर थानाध्यक्ष निलंबित
मामला सामने आने के बाद अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन ने पुलिस की भूमिका की जांच कराई। जांच रिपोर्ट के आधार पर जवां के तत्कालीन थानाध्यक्ष धीरज कुमार को निलंबित कर दिया गया। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है। पुलिस ने महिला सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं करने और कर्तव्य पालन में लापरवाही को कार्रवाई का आधार बताया।

FactGiri का निष्कर्ष
आरोपी को बिना मुकदमा दर्ज किए केवल धारा 151 में छोड़ देने का दावा अधूरा और भ्रामक है। पुलिस के अनुसार, मुकदमा दर्ज कर आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया था। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में उसे अदालत से जमानत मिली। पुलिस की लापरवाही पर थानाध्यक्ष के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है।
FACTGIRI VERDICT: MISLEADING / भ्रामक




