Factgiri Fact Check: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह इलाहाबाद बैंक को लेकर बीजेपी सरकार पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने इलाहाबाद बैंक को बेच दिया। लेकिन FactGiri की पड़ताल में सामने आया कि इलाहाबाद बैंक को बेचा नहीं गया था, बल्कि 1 अप्रैल 2020 को सरकारी क्षेत्र के इंडियन बैंक में उसका विलय कर दिया गया था। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आधिकारिक दस्तावेज भी इसकी पुष्टि करते हैं।
अखिलेश यादव ने क्या कहा?
अखिलेश यादव इलाहाबाद बैंक का जिक्र करते हुए उसके पुराने नाम और पहचान की बात करते नजर आते हैं। वीडियो में अखिलेश यादव कहते हैं बीजेपी सरकार ने उत्तर प्रदेश से ऐतिहासिक रूप से जुड़े इलाहाबाद बैंक को भी बेच दिया।
FactGiri की पड़ताल में क्या सामने आया?
FactGiri ने इस मामले में भारतीय रिजर्व बैंक की 28 मार्च 2020 की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति की जांच की। RBI के अनुसार, भारत सरकार ने 4 मार्च 2020 को इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय करने की योजना अधिसूचित की थी। यह योजना 1 अप्रैल 2020 से लागू हुई।
इसके बाद इलाहाबाद बैंक की सभी शाखाएं इंडियन बैंक की शाखाओं के रूप में काम करने लगीं। इलाहाबाद बैंक के खाताधारक भी इंडियन बैंक के ग्राहक बन गए। इस पूरी प्रक्रिया में बैंक को किसी निजी कंपनी को बेचे जाने का उल्लेख नहीं है।

मोदी सरकार ने क्यों किया था विलय?
अगस्त 2019 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बड़े पुनर्गठन की घोषणा की थी। इसके तहत कई सरकारी बैंकों का विलय किया गया। सरकार ने इस कदम का उद्देश्य बैंकों की वित्तीय क्षमता बढ़ाना, संचालन को अधिक प्रभावी बनाना और बड़े बैंकिंग संस्थान तैयार करना बताया था। इलाहाबाद बैंक और इंडियन बैंक का विलय भी इसी योजना का हिस्सा था।

FactGiri का निष्कर्ष
इलाहाबाद बैंक को बेच दिए जाने का दावा गलत है। RBI के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, 1 अप्रैल 2020 को उसका इंडियन बैंक में विलय हुआ था। दोनों सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक थे और विलय के बाद भी बैंकिंग कारोबार सरकारी क्षेत्र में ही रहा।
FACTGIRI VERDICT: बैंक बेचे जाने का दावा गलत




